छत्तीसगढ़ में बिजली की खपत पांच हजार मेगावाट, उत्पादन 22 सौ मेगावाट

रायपुर(realtimes) प्रदेश में अचानक बिजली की कमी हो गई है, लेकिन बिजली संकट जैसी स्थिति नहीं है। कोरबा वेस्ट संयंत्र में 210 मेगावाट के तीन यूनिट ठप हो गए हैं। ऐसा होने से प्रदेश में उत्पादन 22 साै मेगावाट हो रहा है। बिजली की पूर्ति करने के लिए सेंट्रल सेक्टर से इस समय ढाई हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली लेने की जरूरत पड़ रही है। पीक आवर में खपत पांच हजार मेगावाट तक जा रही है।
मानसून की विदाई तो नहीं हुई है, लेकिन बारिश न होने के कारण उमस होने की वजह से बिजली की खपत बढ़ गई है। कुछ समय पहले तक जो खपत चार हजार मेगावाट से पीक आवर में साढ़े चार हजार मेगावाट तक जा रही थी, वह खपत दिन में जहां साढ़े चार हजार मेगावाट तक जा रही है, वहीं शाम को पीक आवर में यह खपत पांच हजार मेगावाट तक पहुंच रही है। शाम के समय में उद्योग भी चलने लगते हैं।
अपना उत्पादन घटा
कोरबा वेस्ट में 210 मेगावाट के चार और एक 500 मेगावाट का संयंत्र है। इसमें से 210 मेगावाट के तीन यूनिट बंद हो गए हैं। एक यूनिट पहले ही रखरखाव के कारण बंद किया गया था, दो यूनिट अचानक खराबी आने से बंद हो गए हैं। ऐसा होने से 630 मेगावाट का उत्पादन प्रभावित हो गया। छत्तीसगढ़ राज्य उत्पादन कंपनी के संयंत्रों की उत्पादन क्षमता 2960 मेगावाट है। इस समय अपना उत्पादन 22 सौ मेगावाट हो रहा है, वो भी तब की स्थिति में जबकि बांगों की पानी से बिजली का उत्पादन करने वाली 40 मेगावाट की तीन यूनिट चलाई जा रही है।
सेंट्रल सेक्टर का सहारा
अपना उत्पादन कम होने के कारण सेंट्रल सेक्टर से अलग-अलग समय में जरूरत के हिसाब से बिजली ली जा रही है। यहां से रविवार काे दिन में जहां 23 से 25 सौ मेगावाट बिजली ली गई, वहीं पीक आवर में खपत पांच हजार मेगावाट तक जाने पर सेंट्रल सेक्टर से 27 से 28 सौ मेगावाट बिजली ली गई। दो दिन पहले सेंट्रल सेक्टर से बिजली कम मिलने के कारण उद्योगों की बिजली कुछ समय के लिए बंद की गई थी। पावर कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक अब उद्योगों को पूरी बिजली मिल रही है।



