
रायपुर(realtimes) त्योहारी सीजन में जहां एक तरफ हर तरह के सामान महंगे हो रहे हैं, ऐसे समय में पहली बार खाद्य तेलों में त्योहारी ताेहफा मिला है। हालांकि यह राहत बाकी सामानों की महंगाई के सामने में ऊंठ के मुंह में जीरा है लेकिन फिर भी आम आदमी काे इससे कुछ राहत जरूर मिलेगी।
घरेलू किचन के सामानों में लगातार महंगाई बढ़ते जा रही है। दाल, आटा, चावल से लेकर मसालों में कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं। ऐसे समय में खाद्य तेलों में जरूर त्योहारी सीजन में इस बार राहत का बड़ा तड़का लगा है। तेलों की कीमत इस समय 50 से 80 रुपए तक कम हो गई हैं। जो सोया तेल चिल्हर में 180 रुपए तक चला गया था, वह अब चिल्हर में 105 रुपए हो गया है। सरसों तेल ने तो कीमत का दोहरा शतक लगा दिया था, लेकिन अब इसकी कीमत चिल्हर में 135 रुपए हो गई है।
किचन के सामानाें में रिकार्ड महंगी
महंगाई है कि रुकने का नाम नहीं ले रही है। यह साल बड़ा कठिन रहा है। एक-एक करके किचन के उपयोग में आने वाले सामानों की कीमत ने रिकॉर्ड तोड़ा है। राहर दाल पहली बार दो सौ रुपए किलो तक गई है। इसके कारण दूसरी दालें भी सौ रुपए के पार हो गई हैं। मसालों की कीमत में भारी इजाफा हुआ है। पहली बार जीरा आठ साै रुपए किलो तक गया। हालांकि इस समय इसकी कीमत थोक में सात सौ से कम और चिल्हर में 720 रुपए है। सभी मसालों के दाम 20 से 25 फीसदी बढ़े हैं। किचन का ऐसा कोई सामान नहीं है जिसकी कीमत में इजाफा न हुआ हो। लेकिन अब कम से कम तेलों में जरूर राहत मिल रही है।
तेलों की कीमत अब जमीन पर
इस साल तेलों की कीमत ने आम आदमी को रुलाने का काम किया है। जो सोया तेल हमेशा सबसे सस्ता 75 से 80 रुपए एक लीटर बिकता रहा है, वह इस साल थोक में ही 160 रुपए और चिल्हर में 180 रुपए हो गया था। लेकिन अब कीमत बहुत कम हो गई है। थोक में यह 90 से 92 रुपए और चिल्हर में सौ से 105 रुपए में मिल रहा है। राइस ब्रान की कीमत भी डेढ़ सौ के पार हो गई थी। यह 160 रुपए लीटर तक बिका है, लेकिन अब इसकी कीमत सौ थोक में 90 और चिल्हर में सौ रुपए हो गई है। सबसे ज्यादा कीमत अगर किसी तेल की बढ़ी थी, तो वह सरसों तेल है। इसकी कीमत थोक में 190 और चिल्हर में 210 से 220 रुपए तक चली गई थी। लेकिन अब यह थोक में अच्छा तेल लाल गुलाब जैसे ब्रांड का 130 रुपए और चिल्हर में 135 से 140 रुपए है। कम क्वालिटी का सरसों तेल थोक में 110 और चिल्हर में 120 रुपए है। सनफ्लावर तेल 180 रुपए लीटर तक गया है। इसकी कीमत थोक में 95 और चिल्हर में 105 रुपए हो गई है। फल्ली तेल की कीमत हमेशा की तरह ज्यादा है। यह थोक में 160 रुपए और चिल्हर में 170 रुपए है। इसकी कीमत थोक में 220 और चिल्हर में 230 रुपए तक जा चुकी है।
अच्छी फसल से कीमत घटी
कारोबारियों का कहना है कि खाद्य तेलों की कीमत कम होने का सबसे बड़ा कारण फसल का अच्छा होना है। इसी के साथ रूस और यूक्रेन के युद्ध के चलते बाहर के देशों से कच्चा माल आने में जो परेशानी हो रही थी, वह भी अब नहीं हो रही है। कच्चे माल की कीमत में भी कमी आई है।



