ओडिशा के इंजीनियरिंग इन चीफ के कोटेशन से छपी प्रेस रिलीज भ्रामक

छत्तीसगढ़ सरकार ने महानदी जल विवाद पर छपी खबरों पर जताई आपत्ति
दोनों राज्यों के द्वारा जारी किए गए प्रोटोकाल के विरूद्ध
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने ओडिशा के अखबारों में महानदी जल विवाद पर प्रकाशित खबरों पर आपत्ति जताई है और कहा है कि ओडिशा के इंजीनियर इन चीफ के हवाले से प्रकाशित खबर दोनों राज्यों के द्वारा जारी प्रोटोकाल के विरूद्ध है।
इस संबंध में वास्तविक स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ ने इस वर्ष के दौरान अन्य वर्षाे की तुलना में उद्योगों निस्तारी तथा फसलों के लिए सामान्य रूप से ही पानी छोड़ा है। उड़ीसा स्थित हीराकुंड जलाशय की जलग्रहण क्षमता महानदी बेसिन के सभी जलाशयों की जलग्रहण क्षमता से अधिक है। इसलिए उड़ीसा को पानी की कमी के संबंध में आरोप लगाने का कोई आधार ही नहीं है। ओडिशा का महानदी बेसिन का दोहनकारी जल संसाधन प्रबंधन है, जबकि छत्तीसगढ़ स्वयं के द्वारा संरक्षित जल संसाधन के प्रबंधन से लाभान्वित होता है, छत्तीसगढ़ में जल की हर एक बूंद को संरक्षित करने का प्रयास किया जाता है।
छत्तीसगढ़ ने न केवल अपने इन-स्ट्रीम चेकडैम और बैराज के माध्यम से वर्षा जल संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया है, बल्कि मॉनसून रनऑफ को जल के स्तर पर रिचार्ज करने के लिए नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी (एनजीजीबी) कार्यक्रम के माध्यम से बड़े पैमाने पर जल संरक्षण एवं भू-जल स्तर में वृद्धि के उद्देश्य से परियोजना शुरू की है। छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण उपायों से ओडिशा को बहुत लाभ हुआ है, क्योंकि भू-जल को महानदी एवं उसकी सहायक नदियों में छोड़ा जाता है जो अंततः ओडिशा तक ही पहुंचता है।
इस वर्ष 25 अप्रैल 2023 को सेटेलाईट द्वारा ली गई तस्वीर तथा पिछले वर्ष एवं तीन वर्ष पहले एक ही तिथि यानी 25 अप्रैल, 2022 और 25 अप्रैल, 2020 की सेटेलाईट द्वारा ली गई तस्वीर में हीराकुंड जलाशय में महानदी के प्रवाह व्यवस्था एवं उसके जलाशय के ऊपरी स्तर में लगभग कोई अंतर दिखाई नहीं दिया है।
उड़ीसा अभियंत्रिकी विभाग द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति जो कि न्यायाधिकरण के दूसरी बार छत्तीसगढ़ साइट विजिट के बाद जारी की गई, यह दुर्भाग्यपूर्ण है तथा पूर्वाग्रह से ग्रसित है। यह विज्ञप्ति मुख्य अभियंता जैसे उच्चतम अधिकारी के कार्यालय से जारी की गई थी जबकि यह प्रकरण न्यायालय के अधीन है। इस प्रकार की विज्ञप्ति छत्तीसगढ़ और उड़ीसा राज्य के बीच महानदी जल विवाद समझौते संबंधी प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
गौरतलब है कि ओडिशा टीवी डॉट इन पर 26 अप्रैल, 2023 को महानदी जल विवाद पर छत्तीसगढ़ ने ट्रिब्यूनल को भ्रमित करने के लिए कलमा बैराज के 17 द्वार खोले शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई हैं। इसी प्रकार 27 अप्रैल 2023 के द हिंदू के भुवनेश्वर संस्करण में महानदी विवाद विशेषज्ञों ने छत्तीसगढ़ द्वारा नदी में पानी छोड़े जाने के समय पर सवाल उठाया और 27 अप्रैल, 2023 के न्यू इंडियन एक्सप्रेस में छत्तीसगढ़ ने महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण की टीम के दौरे से पहले कलमा बैराज के 20 द्वार खोले शीर्षक से खबरें प्रकाशित हुई हैं।



