आरटीई के गरीब बच्चों को अब नहीं खरीदना पड़ेगा ड्रेस और कॉपी-किताब

पैरेंट्स एसोसिएशन की मांग पर लगी मोहर
रायपुर(realtimes) शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 3 लाख 60 हजार गरीब बच्चे लगभग 6 हजार प्रायवेट स्कूलों अध्ययनरत् है, जिन्हें प्रतिवर्ष 8 से 10 हजार रूपया खर्च कर ड्रेस, कॉपी-किताब और लेखन सामग्री खरीदना पड़ रहा था, जिसको लेकर छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने संचालक को पत्र लिखकर बताया था कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर और स्कूल शिक्षा विभाग के आदेशानुसार प्रायवेट विद्यालयों में आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित गरीब बच्चों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तक, गणवेश एवं लेखन सामग्री उपलब्ध कराने की समुचित व्यवस्था किया जावे, लेकिन ज्यादातर प्रायवेट स्कूलों में तो आरटीई के गरीब बच्चों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तक, गणवेश एंव लेखन सामग्री उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
श्री पॉल ने संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय से यह मांग की थी कि आरटीई के अंतर्गत प्रायवेट स्कूलों में प्रवेशित गरीब बच्चों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तक, गणवेश एवं लेखन सामग्री उपलब्ध कराया जाए जिसके पश्चात् मंगलवार को संचालक ने सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने और प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् आरटीई के बच्चों की मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया गया है, जो प्रायवेट स्कूल आरटीई के गरीब बच्चों को पाठ्य पुस्तक, गणवेश (ड्रेस), एवं लेखन सामग्री निःशुल्क उपलब्ध नहीं कराते है उनके विरूद्ध अधिनियम के प्रावधान अनुसार कार्यवाही कर उच्च कार्यालय का अवगत कराने को भी कहा गया है।
श्री पॉल का कहना है कि प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् लाखों गरीब बच्चों को आरटीई कानून का सुमचित लाभ मिलना चाहिए और जिला शिक्षा अधिकारी इसके लिए पूर्णतः जिम्मेदार है, क्योंकि जिले में प्रायवेट स्कूलों के विरूद्ध कार्यवाही करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को सक्षम प्रधिकारी घोषित किया गया है।



