RSS का भाजपा संगठन में दबदबा, अब उनकी पसंद के ही बनेंगे नए जिलाध्यक्ष

रायपुर(realtimes) प्रदेश भाजपा संगठन में इस समय पूरी तरह से आरएसएस का दबदबा है, सभी बड़े पदों पर आरएसएस से जुड़े लोग बैठे हैं। ऐसे में अब एक सबसे बड़ी बात यह सामने आ रही है कि इस बार जिनको भी जिलाध्यक्ष बनाया जाएगा, वो आरएसएस की पसंद के होंगे। यूं तो पूर्व प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी ने सभी जिलाध्यक्षों को बदलने की तैयारी की थी, लेकिन अब एक दर्जन से ज्यादा जिलों के अध्यक्ष ही बदलने की बात हो रही है। राजधानी रायपुर के साथ ही आधा दर्जन बड़े जिलाें के भी भाजपा अध्यक्ष बहुत जल्द बदले जाने वाले हैं। दीपावली से पहले नामों का ऐलान करने की तैयारी चल रही है।
प्रदेश भाजपा संगठन में अगस्त से प्रारंभ हुए बदलाव की कड़ी में अब बड़ा बदलाव जिलाध्यक्षों का होने वाला है। भाजपा के जानकारों का साफ कहना है, जाे भी जिलाध्यक्ष अपने को अब तक साबित नहीं कर सके हैं और निष्क्रिय माने जा रहे हैं, उनका बदला जाना तय है। इसी के साथ जिन जिलाध्यक्षों को कार्यकर्ता भी पसंद नहीं कर रहे हैं और जो कार्यकर्ताओं की सुनते ही नहीं हैं, उनकी विदाई भी तय है।
बड़े पदाें पर आरएसएस के नेता
भाजपा से जुड़े जानकारों का साफ कहना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब भाजपा में जो भी बदलाव हो रहा है, उसमें आरएसएस से जुड़े लोगों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इस समय प्रदेश संगठन के सभी प्रमुख पदों पर आरएसएस के लोग ही काबिज हैं। चाहे वे राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री और प्रदेश के संगठन प्रभारी शिवप्रकाश हों, नए प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के साथ ही प्रदेश के नए अध्यक्ष बनाए गए अरूण साव भी आरएसएस से जुड़े रहे हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि आरएसएस ने जिलाध्यक्षों का सर्वे कराने के बाद जो नए नाम सुझाए हैं, उनको ही प्राथमिकता के साथ जिलाध्यक्ष बनाया जाएगा।
रायपुर में संजय पहली पसंद
भाजपा के इस समय 30 संगठन जिले हैं। इनमें से एक दर्जन से ज्यादा जिलों के अध्यक्ष निशाने पर हैं। इसमें आधा दर्जन बड़े जिले रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, राजनांदगांव, अंबिकापुर और जगदलपुर भी शामिल हैं। राजधानी रायपुर शहर अध्यक्ष को भी बदलने जाने की बात हो रही है। यहां पर श्रीचंद सुंदरानी के स्थान पर जिनके नाम चल रहे हैं, उसमें पहला नाम और आरएसएस की पसंद आरडीए के पूर्व अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव बताए जा रहे हैं। श्री श्रीवास्तव का नाता आरएसएस से काफी पुराना है, वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में काम कर चुके हैं। उनके अलावा जो नाम दावेदारों के रूप में लिए जा रहे हैं, उनमें जयंती पटेल, प्रफुल्ल विश्वकर्मा और ओंकार बैस के नाम भी हैं।



