Mumbai Attack: अमेरिका भारत के साथ मिलकर खड़ा हुआ, मुंबई हमला मामले में तहव्वुर राणा की याचिका खारिज करने का अनुरोध

Mumbai Attack: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद से भारत-अमेरिका के संबंध गहराए हुए हैं। यह देखा जा सकता है कि अब अमेरिका भारत के साथ खड़ा दिख रहा है, जैसे कि मुंबई हमले के मामले में। अमेरिका सरकार ने कैलिफोर्निया की अदालत से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को अस्वीकार करने का आग्रह किया है। अमेरिका ने कहा है कि इस मामले को भारत के पास भेजना चाहिए, क्योंकि वह इस घटना के संबंध में जानना चाहता है। यह बताया जाता है कि अमेरिकी अदालत ने मई में 62 साल के राणा को भारत को सौंपने की मंजूरी दी थी, लेकिन राणा ने इसके खिलाफ याचिका दायर की है।
वर्तमान में राणा लॉस एंजिलिस में हिरासत में है। भारत ने राणा को गिरफ्तार करने की मांग की थी और इसके लिए 10 जून 2020 को शिकायत दर्ज की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने राणा के भारत प्रत्यर्पण का समर्थन किया था, उसे मंजूरी दी थी। कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी वकील ई मार्टिन एस्ट्राडा ने अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के सामने दायर अभिवेदन में कहा, “अमेरिका अनुरोध करता है कि अदालत राणा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को अस्वीकार करें।” एस्ट्राडा ने कहा कि याचिकाकर्ता दिखा रहा है कि भारत के प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोध में पर्याप्त सबूत नहीं है। राणा ने पिछले महीने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है, जिससे वह अमेरिका सरकार के अनुरोध को चुनौती दे रहा है।
अमेरिका ने राणा के दावों को नकारा
अमेरिकी वकील एस्ट्राडा ने 23 जून को एक याचिका दाखिल की जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि राणा का मुंबई में स्थित व्यापार का दावा गलत है। उन्होंने कहा कि प्रमाण राणा के दावे की पुष्टि नहीं करते हैं कि मुंबई में स्थित कार्यालय में वास्तविक व्यापार होता था, और यदि ऐसा होता था भी, तो व्यापारिक गतिविधियाँ नहीं साबित करतीं कि राणा के व्यापार ने उसके बचपन के दोस्त, पाकिस्तानी-अमेरिकी डेविड कोलमैन हेडली, की मुंबई में आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों को छुपाने में मदद की थी। एस्ट्राडा ने कहा, “राणा के दावों के मुताबिक मुंबई कार्यालय के वित्त पोषण संबंधी तथ्य भी इस बात से मेल नहीं खाते हैं कि उसे हेडली की गतिविधियों की जानकारी नहीं थी और उसने उन्हें समर्थन नहीं दिया।” हेडली मुंबई हमले के प्रमुख आपत्तिकर्ताओं में से एक था। भारतीय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) राणा की भूमिका की भूमिका की जांच कर रहा है। नवंबर 2008 में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा मुंबई में किए गए हमलों में राणा का योगदान जांचा जा रहा है।
अमेरिका ने कहा – तहव्वुर राणा को पहले से ही मुंबई हमले की जानकारी थी
मुंबई हमलों के दौरान पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब को गिरफ्तार किया गया था, जिसे 21 नवंबर 2012 को भारत में फांसी की सजा सुनाई गई। बाकी आतंकवादियों को सुरक्षाबलों ने हमले के दौरान ढेर कर दिया था। मुंबई आतंकवादी हमलों में छह अमेरिकी नागरिकों सहित कुल 166 लोगों की जान गई थी। एस्ट्राडा ने कहा, ‘‘2008 में जब हेडली को पता चला कि राणा चीन और भारत की यात्रा करने वाला है, तो उसने राणा को सतर्क करने का फैसला किया कि एक साजिशकर्ता हमला कर सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘राणा और साजिशकर्ता के बीच संवाद की जानकारी नहीं मिली है, लेकिन एफबीआई (संघीय जांच ब्यूरो) ने सात सितंबर 2009 की बातचीत से पता लगाया था कि राणा ने हेडली को बताया था कि उनके साजिशकर्ता ने उसे (राणा को) सतर्क किया था कि मुंबई में हमला होने वाला है।’’ उन्होंने कहा कि यह बात राणा के दावों का समर्थन नहीं करती है कि उसे हमले की जानकारी नहीं थी।
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