CM भूपेश के पत्र के बाद कोल मंत्रालय का एक्शन, कोल इंडिया से मांगा पूरा ब्यौरा - realtimes
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CM भूपेश के पत्र के बाद कोल मंत्रालय का एक्शन, कोल इंडिया से मांगा पूरा ब्यौरा

रायपुर(realtimes) प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की राज्य के उद्याेगाें काे कोयला संकट से उबारने की पहल रंग लाती दिख रही है।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा केंद्रीय कोल मंत्री प्रहलाद जोशी को लिए गए पत्र को लेकर केंद्रीय कोल मंत्रालय ने कोल इंडिया को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के उद्योगों को होने वाली कोयले की सप्लाई का पूरा ब्याैरा मांगा है। प्रदेश के उद्योग को उम्मीद है कि जल्द ही उसके लिकेंज की समस्या के साथ कोयला संकट का समाधान हो जाएगा। इसके पहले केंद्रीय स्टील मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी देश भर के स्टील उद्योगों की बैठक करके उनकी समस्या के बारे में जाना था। स्टील मंत्रालय भी समस्या के समाधान में लगा हुआ है।

प्रदेश के स्पंज आयरन उद्योगों को भी कोल इंडिया के एसईसीएल से कोयला मिलता है। इनका पांच साल का लिंकेज समाप्त हो गया है। ऐसे में इनको इस साल से कोयला मिलना बंद हो गया है। इसको लेकर भारी संकट की स्थिति है। अगर कोल इंडिया से कोयला नहीं मिला तो उद्योगों में ताले लग जाएंगे। इस समय जिन उद्योगों का मार्च का बैकलॉक कोयला बचा था, वह मिला है। स्पंज आयरन एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल नचरानी का कहना है, अलग-अलग उद्योगों का अलग-अलग लिंकेज रहता है, लेकिन अब सभी का लिकेंज समाप्त हो गया है और किसी के पास भी लिंकेज का कोयला नहीं है। ऐसे में उद्योगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इस समय काम विदेशी कोयले से चल रहा है। इसकी कीमत ज्यादा होने से लंबे समय तक इसके भरोसे उद्योग नहीं चल सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने लिखा था पत्र

उद्योगों ने अपनी समस्या से जहां एक तरफ केंद्रीय मंत्रियों के सामने अपनी समस्या रखी है, वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी अपनी समस्या से अवगत करवाया। इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 30 जुलाई काे केंद्रीय कोल मंत्री प्रहलाद जोशी को प्रदेश के उद्योगों की समस्या का समाधान करने के लिए पत्र लिखा। इस पत्र में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि प्रदेश में एसईसीएल में हर साल 15 करोड़ टन कोयले का उत्पादन होता है। प्रदेश में कई बड़े स्टील उद्योगों के साथ मिनी स्टील उद्योग भी हैं। इनसे लाखों लोगों की जीविका जुड़ी है। इनको हर साल करीब डेढ़ कराेड़ टन कोयला लगता है, लेकिन एसईसीएल से इनको 60 लाख टन कोयला ही मिल पाता है। अब तो अगस्त से उद्योगों को कोयला मिलना भी बंद हो रहा है। ऐसे में राज्य की अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट और उद्योगों में तालाबंदी भी हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से छत्तीसगढ़ के उद्योगों को कोयले की आपूर्ति नियमित करने के निर्देश एसईसीएल को देने का आग्रह किया था।

कोल इंडिया से मांगी जानकारी

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पत्र लिखने के करीब एक माह बाद अब जाकर केंद्रीय कोल मंत्रालय कोल इंडिया को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है। कोल इंडिया के सीएमडी को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का पत्र भी भेजा गया है और उनके आधार पर पूरी जानकारी मांगी गई है। छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन के अध्यक्ष अनिल नचरानी का कहना है, कोल इंडिया से जानकारी मिलने के बाद संभावना है कि हमारे उद्योगों के लिकेंज पर कोल मंत्रालय फैसला करेगा और उद्योगों को कोयला मिलने लगेगा।

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