
साल्वे ने जवाब दिया कि दलबदल विरोधी कानून असंतोष विरोधी कानून नहीं हो सकता।
प्रधान न्यायाधीश ने सवाल किया कि निर्वाचित होने के बाद राजनीतिक दलों की पूरी तरह से अनदेखी करना क्या यह लोकतंत्र के लिए खतरा नहीं है? न्यायमूर्ति रमना ने आगे पूछा, “आप कहते हैं कि इस अदालत और उच्च न्यायालय को यह नहीं सुनना चाहिए और यह तब है जब आपने हमसे पहले संपर्क किया था।”
साल्वे ने कहा कि इस मामले के तथ्यों में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह पता चले कि इन लोगों ने पार्टी छोड़ दी। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने साल्वे से कहा, “आज आप कहते हैं कि अदालत इस मुद्दे पर नहीं जा सकती, क्योंकि अध्यक्ष के पास शक्ति है।” साल्वे ने शिंदे गुट की ओर से कहा, “मैं अयोग्य नहीं हूं, मैंने पार्टी नहीं छोड़ी है।”
उद्धव ठाकरे गुट का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मुद्दे को संविधान पीठ के पास भेजने की कोई आवश्यकता नहीं है।



