सेमीकंडक्टर से डिजिटल एसेट तक, भारत-सिंगापुर आर्थिक सहयोग पर मंथन

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को सिंगापुर में वैश्विक निवेश कोषों, बैंकों और कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने भारत में बुनियादी ढांचे वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य सेवा तथा अन्य वृद्धि वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक निवेश बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।
वित्त मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में बताया कि चर्चा का मुख्य केंद्र बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं और भारत की विकास संभावनाओं से जुड़े अन्य क्षेत्रों में निवेश को समर्थन देने में संस्थागत निवेशकों की भूमिका पर रहा।
इन बैठकों के दौरान वित्त मंत्री ने भारत के दीर्घकालिक वृद्धि परिदृश्य, उभरते निवेश परिवेश, देश की विकासात्मक प्राथमिकताओं के समर्थन में वैश्विक संस्थागत तथा निजी पूंजी जुटाने के उपायों पर विचार साझा किए।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने तीन दिवसीय सिंगापुर के दौरे के क्रम में भारत में बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य देखभाल, नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश का विस्तार करने के अवसर तलाशे।
सीतारमण ने आज सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन (एसबीएफ) के चेयरमैन मार्क ली से मुलाकात की। इस दौरान वहां उनके साथ एसबीएफ की वाइस चेयरमैन योंग हसिन यू और SBF इंडिया बिजनेस कमेटी के चेयरमैन श्री प्रसून मुखर्जी भी मौजूद थे।
मंत्रालय के मुताबिक इस बातचीत का मुख्य फोकस भारत और सिंगापुर के बीच बिजनेस संबंधों को मजबूत करने पर था।
इसके लिए खास तौर पर बिजनेस मैचिंग और सिंगापुर के बिजनेस डेलिगेशन के भारत दौरे पर जोर दिया गया, ताकि वे भारतीय बिजनेस और राज्यों के साथ सार्थक बातचीत कर सकें।
2027 में सिंगापुर के पास आने वाली आसियान (आसियान) की अध्यक्षता, द्विपक्षीय और क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को और गति देने का एक मौका प्रदान करती है।
एसबीएफ ने सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर प्रकाश डाला, जिनमें सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, एमआरओ, खाद्य सुरक्षा और खाद्य प्रसंस्करण शामिल हैं।
इसी क्रम में सीतारमण ने आज सिंगापुर में मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर (एमएएस) के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर लियोन्ग सिंग चियोंग से मुलाकात की।
इस दौरान एमएएस की टीम ने टोकनाइज़ेशन पर अपना नज़रिया पेश किया और बताया कि कैसे एमएएस डिजिटल एसेट इकोसिस्टम के विकास को बढ़ावा दे रहा है।
दोनों पक्षों के बीच बातचीत में टोकनाइज़ेशन से होने वाले संभावित फ़ायदों, इंटरऑपरेबिलिटी और भरोसेमंद सेटलमेंट व्यवस्थाओं के महत्व, और इससे जुड़ी कुछ रेगुलेटरी चुनौतियों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने ऐसी उभरती हुई तकनीकों पर मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
इसके अलावा उन्होंने टेमासेक होल्डिंग्स के सीईओ दिलहान पिल्लई संद्रासेगरा से भी मुलाकात की और भारत में निवेश के अवसरों को बढ़ाने पर चर्चा की।
विशेष रूप से बुनियादी ढांचा क्षेत्र में और राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के माध्यम से निवेश पर जोर दिया गया।
सीतारमण ने सिंगापुर के सॉवरेन वेल्थ फंड जीआईसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लिम चो कियाट से मुलाकात की और भारत के दीर्घकालिक वृद्धि परिदृश्य तथा बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में संस्थागत निवेशकों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया।
वहीं, एक अलग बैठक में सीतारमण ने प्राइवेट इक्विटी फर्म टीपीजी के कार्यकारी चेयरमैन एवं संस्थापक साझेदार जिम कूल्टर से मुलाकात की और भारत के दीर्घकालिक वृद्धि परिदृश्य तथा देश के बढ़ते निवेश परिदृश्य में निजी पूंजी की भागीदारी के अवसरों पर चर्चा की।



