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इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का समापन, भारत की बढ़ी भूमिका

नई दिल्ली। देश की राजधानी नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 का ऐतिहासिक 10वां संस्करण शनिवार को संपन्न हुआ।

चार दिनों तक चले इस आयोजन में महत्वपूर्ण चर्चाएं, बहुपक्षीय सहयोग और तकनीकी प्रदर्शन हुए, जिन्होंने ग्लोबल डिजिटल क्रिएटर के तौर पर भारत की स्थिति को और मजबूत किया है।

आईएमसी 2026 बिना सीमाओं के विस्तार थीम पर केंद्रित समापन दिवस में उच्च स्तरीय नीतियों और मानकीकरण को जमीनी स्तर पर लागू करने पर ध्यान दिया गया।

इसमें एग्री-फूड सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल, युवाओं के नेतृत्व वाली अत्याधुनिक रोबोटिक्स, ऑटोनोमस 5जी एआई एजेंट और लास्ट माइल डिजिटल डिलीवरी की प्रशासनिक जरूरतों पर खास चर्चा की गई।

स्वदेशी आईपी और संप्रभु सेमीकंडक्टर के विजन के साथ प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी के द्वारा आईएमसी का उद्घाटन करने से लेकर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा ग्लोबल 6जी पेटेंट में 10 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने के भारत के लक्ष्य को रेखांकित करने तक इस दशक के संस्करण ने देश की उस छलांग को और मजबूत किया है, जिसमें वह टेक्नोलॉजी का सिर्फ उपभोक्ता ना रहकर वैश्विक दूरसंचार मानकों का निर्माता बन गया है।

आईएमसी 2026 के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रामकृष्ण पी. ने इस अवसर पर कहा, “इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण ने एक निर्णायक मानक स्थापित किया है कि किस प्रकार डिजिटल मंच ठोस बदलाव लाते हैं।

पिछले चार दिनों में आईएमसी 2026 ने दिखाया है कि भारत की डिजिटल कहानी अब सिर्फ नई सेवाओं को लांच करने और बड़े पैमाने पर विस्तार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानक तय करने, अपनी खुद की टेक्नोलॉजी विकसित करने और लक्ष्य आधारित नवप्रवर्तन को बढ़ावा देने के बारे में है।

इंटरनेशनल 6जी सिंपोजियम से लेकर खेती में एआई और युवाओं के लिए रोबोटिक्स पर हमारे आखिरी फोकस तक इस संस्करण ने दुनिया को यह दिखाया है कि भारत एक ऐसा समावेशी, मजबूत और आत्मनिर्भर टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम बना रहा है जो बिना सीमा के आगे बढ़ सकता है।”

इस आयोजन के चौथे दिन खास क्षेत्र से जुड़े कामों पर जोर दिया गया जिसका प्रारंभ इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) के साथ मिलकर आयोजित “एग्री फूड सिस्टम के लिए एआई पर वैश्विक पहल” की बैठक से हुआ।

जमीनी स्तर पर नवप्रवर्तन और भविष्य के लिए तैयार प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए इस फोरम में “रोबोटिक्स फॉर गुड यूथ चैलेंज इंडिया” का आयोजन किया गया।

इसे आईटीयू और आईआईटी दिल्ली के आई-हब फाउंडेशन फॉर कोबोटिक्स (आईएचएफसी) ने दूरसंचार विभाग के सहयोग से आयोजित किया।

इसके साथ ही, आईटीयू बिल्ड-अ-थॉन में डेवलपर्स और डेवलपर-इकोसिस्टम की क्षमताओं पर खास ध्यान दिया गया। यहां इंजीनियरों ने 5जी नेटवर्क प्रदर्शन के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए स्वायत्त एआई एजेंट तैनात किए और साथ ही डिजिटल डिफेंस गेम्स में इंटरएक्टिव साइबर चुनौतियां भी पेश कीं।

एक्स्ट्रा माइल फॉर दि लास्ट माइल सत्र में टिकाऊ वित्त पोषण के तरीकों, ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड लगाने और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी सुरक्षाओं पर चर्चा की गई।

इसका उद्देश्य यह पक्का करना था कि हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से हर ग्राम पंचायत को सीधे तौर पर आर्थिक मजबूती मिले।

आईएमसी 2026 के चौथे दिन उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं के विचार-
टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्डाइजेशन ब्यूरो (टीएसबी) के उप निदेशक, और इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) के स्टडी ग्रुप्स एवं नीति विभाग के प्रमुख डॉक्टर बिलेल जैमोउसी ने कहा, “खेती और भोजन हर व्यक्ति, हर समुदाय और हर देश से जुड़े हैं और एआई अब प्रयोगशालाओं से निकल कर असल अर्थव्यवस्था में आ रहा है ताकि उनकी सबसे बड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सके।

लेकिन एआई सॉल्यूशन की असल परख इस बात से नहीं होती कि उसका एल्गोरिदम कितना एडवांस्ड है, बल्कि इस बात से होती है कि क्या वह छोटे किसान की किसी असल समस्या को हल करता है।

यही वजह है कि एआई को सिर्फ किसानों के लिए नहीं, बल्कि उनके साथ मिलकर विकसित किया जाना चाहिए। इसमें अंतरराष्ट्रीय मानक अहम भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे नवप्रवर्तन की गति को धीमा नहीं करते, बल्कि वे इसे बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद करते हैं और बिखराव को रोकते हैं.

ताकि समाधान केवल अलग थलग पायलट प्रोजेक्ट्स तक सीमित ना रह जाएं। सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, शोधकर्ताओं, उद्योग और निवेशकों के आपसी सहयोग से हम अपने विजन को हकीकत में बदल सकते हैं और सभी के लिए एक टिकाऊ, मजबूत और सुरक्षित खाद्य भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।”

दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ उप महानिदेशक और टीईसी प्रमुख श्री सैयद तौसीफ अब्बास ने कहा, “कनेक्टिविटी हमारे खेतों को जोड़ती है, इंटरऑपरेबिलिटी हमारे सिस्टम को जोड़ती है और एआई नवप्रवर्तन को प्रभाव से जोड़ता है।

लेकिन इस वैश्विक पहल की सफलता ना केवल तकनीकी प्रगति से बल्कि किसानों की आजीविका, कृषि उत्पादकता, सप्लाई चेन की दक्षता और खाद्य सुरक्षा में ठोस सुधारों से मापी जाएगी।

इसके लिए, एआई समाधान पारदर्शी, समावेशी और सुलभ होना चाहिए। साथ ही डेटा की गुणवत्ता, निजता और छोटे व सीमांत किसानों की जरूरतों पर भी उचित ध्यान दिया जाना चाहिए।

साथ ही इन्हें अतरराष्ट्रीय मानकों का भी समर्थन मिलना चाहिए ताकि अलग अलग देशों में बने समाधान एक दूसरे के साथ प्रभावी ढंग से काम कर सकें।”

दूरसंचार विभाग के टेलीकम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग सेंटर (टीईसी) के उप महानिदेशक देवेंद्र सिंह ने कहा, “एआई सिस्टम का मूल्यांकन करने के लिए पारंपरिक कंप्यूटिंग मानकों से आगे बढ़कर निष्पक्षता, पारदर्शिता और मजबूती के लिए व्यवस्थित रूपरेखाओं की ओर बढ़ना जरूरी है।

एआई में पक्षपात कई चरणों में पैदा होता है जैसे कि बिना छांटे गए ट्रेनिंग डेटा और आउटलायर्स से लेकर मॉडल चुनने और उसे लागू करने के माहौल तक।

इस समस्या से निपटने के लिए हम कई स्तरों पर जोखिम का आकलन करते हैं। इसमें डोमेन विशिष्ट मेट्रिक के मूल्यांकन के साथ साथ सुरक्षित विशेषताओं और प्रतिकूल परिस्थितियों में अनुभवजन्य परीक्षण को शामिल किया जाता है।

एक सच में मजबूत एआई सिस्टम को मुश्किल या असामान्य हालात में भी भरोसेमंद तरीके से काम करना चाहिए, सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना चाहिए और एकीकरण के हर स्तर पर मापने लायक और पारदर्शी नतीजे देने चाहिए।”

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के उप निदेशक (खाद्य एवं कृषि विभाग) देबाशीष महालिक ने कहा, “एआई आधारित खेती तभी सार्थक प्रभाव डाल सकती है जब टेक्नोलॉजी को डेटा की गुणवत्ता, निजता, सुरक्षा और इंटरऑपरेबिलिटी के लिए मजबूत मानकों का समर्थन मिले।

भारतीय मानक ब्यूरो में हमारा ध्यान डिजिटल खेती के लिए एक ऐसी व्यवस्था वार रूपरेखा तैयार करने पर है जो भारत की खेती के विविध इकोसिस्टम को दिखाए और जिसमें छोटे और सीमांत किसान भी शामिल हों।

सभी संबंधित पक्षों को एक साथ लाकर आम मानक बनाने से हम ऐसे भरोसेमंद, बड़े स्तर पर लागू होने वाले और टिकाऊ कृषि समाधान तैयार कर सकते हैं जो नवप्रवर्तन को जमीनी स्तर पर ठोस लाभ में बदल सकें।”

बोन सिस्टम्स के सीटीओ जैन रेडलिक ने कहा, “खेती में एआई अपने वादे को तभी पूरा कर सकता है जब डेटा को अलग अलग सिस्टम के बीच साझा किया जा सके और साथ ही यह भी पक्का किया जाए कि किसान अपने डेटा पर अपना नियंत्रण बनाए रखे।

आज बिखरे हुए डिजिटल इकोसिस्टम ऐसे अलग अलग हिस्से (साइलो) बनाते हैं जो इंटरऑपरेबिलिटी, एक्सेस और भरोसे को सीमित करते हैं।

कृषि के लिए एआई पर फोकस ग्रुप द्वारा तैयार किया गया रेफरेंस आर्किटेक्चर, साझा सिमेंटिक्स, ओपन इंटरफेस और डिजाइन के जरिए संप्रभुता के माध्यम से इस मुद्दे को हल करता है।

डेटा मॉडल, पहचान और एक्सेस के जरिए मौजूदा मानकों का इस्तेमाल करके यह एप्लीकेशन और सर्विस को अलग अलग प्लेटफॉर्मों पर काम करने में मदद करता है।

इससे नए साइलो बनाए बिना नए इस्तेमाल के तरीके सामने आते हैं जिससे खेती किसानी का एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलती है जो अधिक जुड़ा हुआ, भरोसेमंद और आपस में आसानी से काम करने वाला हो।”

 

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