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बिजली के तारों को मुक्त करने का टेंडर अब रेट में फंसा, जांच में जुटी पॉवर कंपनी

रायपुर(realtimes) सरकारी कामाें का ठेका लेने के लिए किस तरह से सिंडीकेट बनाकर  काम किया जाता है, इसका बड़ा नमूना राजधानी रायपुर में सामने आया है। शहर के कई मार्गों के बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने वाला टेंडर भरने वाली तीन कंपनियों ने इसकाे अबब रेट में भरा और एक कंपनी के टेंडर काे अबब रेट में मंजूरी दिलाने की कवायद चल रही है। एक बार पहले ही योजना की लागत में छह करोड़ का इजाफा होने के बाद टेंडर किया गया। टेंडर को योजना में तय 31 करोड़ की लागत से ज्यादा का भरने वाली कंपनी का टेंडर फाइनल करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी के वित्त विभाग के पास भेजा गया तो अबब रेट वाले टेंडर को लेकर गड़बड़ी की आशंका में जांच प्रारंभ कर दी गई है। जब तक जांच पूरी नहीं होगी टेंडर फाइनल नहीं होगा।

राजधानी रायपुर के ज्यादातर मार्गों में बिजली के तारों का जाल बिछा हुआ है। इसकी वजह से बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर बाजारों के तारों से ज्यादा परेशानी होती है। करीब डेढ़ दशक पहले बाजारों को तारों से मुक्त करने की योजना बनाई गई, लेकिन यह योजना पूरी नहीं हो सकी। अब एक बार फिर से योजना बनाई गई है। इस बार योजना के पूरे होने की संभावना है, लेकिन इसमें भी अब एक बड़ा पेंच टेंडर में गड़बड़ी का फंस गया है।

पहले छह कराेड़ बजट बढ़ा

स्मार्ट सिटी को जब छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी ने योजना के लिए मार्च 2022 में स्टीमेट बनाकर भेजा, तब इसके लिए 25 करोड़ लग रहे थे। ऐसे में स्मार्ट सिटी ने 25 करोड़ का फंड दे दिया, लेकिन जब योजना को प्रारंभ करने की बारी आई तो मालूम हुआ कि बजट में बिल्डिंग मटेरियल महंगे होने के कारण छह करोड़ का इजाफा हो गया है। ऐसे में पॉवर कंपनी ने अंतर की राशि की मांग स्मार्ट सिटी से की तो स्मार्ट सिटी ने यह राशि भी दे दी। इसके बाद नए सिरे से टेंडर किया गया।

टेंडर में गड़बड़ी की आशंका

31 करोड़ की योजना का टेंडर करने के बाद टेंडर को अबब में भरने वाली प्रदेश की ही एक कंपनी को देने की तैयारी है। तीन कंपनियों ने योजना में टेंडर भरा था। बताया जा रहा है, सभी कंपनियों का रेट अबब में भरा गया है। ऐसे में जिस कंपनी का सबसे कम अबब वाला रेट है, उस कंपनी का टेंडर फाइनल करने के लिए टेंडर को पॉवर कंपनी के वित्त विभाग के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। अबब वाले टेंडर को मंजूरी के लिए भेजने पर वित्त विभाग को हैरानी है और गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए इस मामले की जांच की जा रही है। टेंडर की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी जहां यह मान रहे हैं कि अबब वाला टेंडर वित्त विभाग के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है, वहीं पॉवर कंपनी के एक बड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मामले की जांच की जा रही है, जांच पूरी हुए बिना टेंडर को फाइनल नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया, इसी तरह की गड़बड़ी पहले बिलासपुर में भी हो चुकी है। टेंडर भरने वाले सिंडीकेट बनाकर काम करते हैं और अबब में रेट भर देते हैं, इसके बाद दबाव बनाकर टेंडर मंजूर करवाने का भी काम करते हैं।

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