
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत के स्टार्टअप इको-सिस्टम का विश्व में ऊंचा स्थान है। हमारे देश में स्टार्टअप्स की सफलता, विशेषकर यूनिकॉर्नस की बढ़ती संख्या, हमारी औद्योगिक प्रगति का शानदार उदाहरण है। विश्व में चल रही आर्थिक कठिनाई के विपरीत, भारत की अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाने का श्रेय सरकार और नीति-निर्माताओं को जाता है। पिछले कुछ साल के दौरान फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री गति-शक्ति योजना के द्वारा कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा रहा है। परिवहन के जल, थल, वायु आदि मार्गों पर आधारित सभी माध्यमों को भली-भांति एक दूसरे के साथ जोड़कर पूरे देश में आवागमन को सुगम बनाया जा रहा है। इसका श्रेय कड़ी मेहनत करने वाले हमारे किसान और मजदूर भाई-बहनों को भी जाता है। साथ ही हमारे उद्यमियों को भी जाता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सबसे खुशी की बात यह है कि देश का आर्थिक विकास और अधिक समावेशी होता जा रहा है और क्षेत्रीय विषमताएं भी कम हो रही हैं। लेकिन यह तो केवल शुरुआत है। दूरगामी सुधारों और नीतियों द्वारा इन परिवर्तनों की आधार-भूमि पहले से ही तैयार की जा रही थी। उदाहरण के लिए डिजीटल इंडिया अभियान द्वारा ज्ञान पर आधारित अर्थव्यवस्था की आधारशिला स्थापित की जा रही है। ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ का उद्देश्य भावी पीढ़ी को औद्योगिक क्रांति के अगले चरण के लिए तैयार करना और उन्हें हमारी विरासत के साथ फिर से जोड़ना भी है।



