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60 रुपये प्रति किलो तक घटे कॉटन के धागे के भाव

पानीपत, 24 जुलाई (निस)

कपास व कॉम्बर नोइल के करीब दो माह पहले बहुत ज्यादा बढ़े भाव से कॉटन के धागे का भाव आसमान छू रहा था। धागे का भाव पीक पर पहुंचने से पानीपत के निर्यातकों व घरेलू कारोबारियों को पुराने भाव पर लिये गये टेक्सटाइल उत्पादों के ऑर्डरों को पूरा करने में दिक्कत आ रही थी।

कपास का 11 हजार रुपये प्रति मन और कॉम्बर नोइल का 170 रुपए प्रति किलो तक भाव पहुंच गया था। कॉटन के 20 काउंट धागे का भाव भी दोमाह पहले 280 रुपए प्रति किलो हो गया था।

अब निर्यातकों के ऑर्डर कम होने से कॉटन के धागा का भाव करीब 60 रुपए प्रति किलो तक नीचे गिरा है। कपास का भाव 11 हजार से घटकर करीब 9 हजार रुपए प्रति मन रह गया है। कॉटन का धागा बनाने में कपास के साथ प्रयोग होने वाली कॉम्बर नोइल का भाव भी 170 रुपए से गिरकर करीब 100 रुपए प्रति किलो रह गया है। पानीपत की करीब 50 धागा मिलों में अभी भी करीब 900 टन धागे का रोजाना उत्पादन हो रहा है। इसमें से करीब 60 फीसदी धागा तो महाराष्ट्र के कोल्हापुर, सोल्हापुर व भिवंडी, राजस्थान के किशनगढ़, यूपी के मुरादनगर, एमपी के उज्जैन और गुजरात के अहमदाबाद आदि में जाता है और बाकि का 40 फीसदी धागा पानीपत के निर्यातकों व घरेलू कारोबारियों द्वारा टेक्स्टाइल उत्पाद बनाने में प्रयोग हो जाता है। धागा मिल संचालक एवं समाजसेवी राकेश मुंजाल ने बताया कि यहा के एक्सपोर्टरों के निर्यात के ऑर्डर कम होने से धागे के रेट में भारी गिरावट आई है।

निर्यात के ऑर्डर कम होने के अलावा ईद व कांवड़ मेला का भी असर कॉटन के धागे के भाव पर पड़ा है। पानीपत से कॉटन का धागा यूपी में भी बड़ी मात्रा में जाता है और ईद व कांवड़ मेले के चलते काम कम हुआ तो धागे का भाव गिरा है। हर वर्ष बारिश के मौसम में भी धागे की मांग में कमी आती है और बारिश का भी असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि यहां की धागा मिलों में 2, 4, 6,10, 14, 16, 18, 20, 24, 30 और 32 काउंट का धागा बनता है, पर आमतौर पर ज्यादा धागा 20 काउंट का चलता है।

अमेरिका के बॉयरों के पास पहले ही पड़ा हुआ है स्टॉक : निर्यातक

पानीपत के प्रमुख कारपेट निर्यातक जितेंद्र मलिक ने बताया कि पानीपत से होने वाले निर्यात का करीब 70 फीसदी तो अमेरिका और बाकि 30 फीसदी टेक्सटाइल उत्पादों का निर्यात यूरोपियन व दूसरे देशों में होता है। अमेरिका के बॉयरों के पास पहले से ही भारी मात्रा में टेक्सटाइल उत्पादों का स्टॉक पड़ा हुआ है। अमेरिका के लिये कंटेनर का भाड़ा पहले करीब 3 हजार रुपए डालर होता था और वह अब बढ़कर 12-13 हजार डालर हो चुका है। अमेरिका के बॉयर जहां ऑर्डर कम दे रहे हैं, वहीं वे पहले दिये गये ऑर्डरों के तैयार माल को भी होल्ड कर रहे हैं। बॉयर यहां के निर्यातकों से तैयार माल मंगवाने को लेकर बार-बार टाइम बढ़ा रहे हैं। इससे पानीपत के निर्यातकों को आर्थिक रूप से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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