
उन्होंने कहा, ‘भारत केवल हिंदुओं का देश नहीं हो सकता। साथ ही अकेले मुसलमान भारत का निर्माण नहीं कर सकते। हर किसी को एक साथ मिलकर काम करना होगा।’
अमर्त्य सेन ने कहा कि भारत में सहिष्णुता की एक अंतर्निहित संस्कृति थी क्योंकि यहूदी, ईसाई और पारसी सदियों से हमारे साथ रहे थे।



