35 करोड़ की ई-पॉस मशीनों का किराया 140 करोड़

14,085 राशन दुकानों में लगी मशीनें; 92 करोड़ का भुगतान हो चुका, 48 करोड़ और देने होंगे
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राशन वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए लगाई गईं बॉयोमीट्रिक ई-पॉस मशीनें सरकारी खजाने पर भारी पड़ रही हैं। मीडिया की पड़ताल के मुताबिक बाजार में करीब 13 से 15 हजार रुपए में मिलने वाली मशीनों के लिए सरकार पांच साल के अनुबंध में करीब 140 करोड़ रुपए का भुगतान कर रही है। इसमें करीब 92 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं, जबकि लगभग 48 करोड़ रुपए और भुगतान किया जाना है।
प्रदेश की 14,085 उचित मूल्य दुकानों में लगी इन मशीनों पर चार साल में 91.78 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। वहीं, सभी मशीनों की सीधी खरीद, 4जी डेटा और तकनीकी व्यवस्था पर करीब 35 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इस हिसाब से रेंटल मॉडल में करीब 105 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा है।
हैदराबाद की कंपनी से पांच साल का करार
छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने हैदराबाद की लिंकवेल टेलीसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड से पांच साल का अनुबंध किया है। कंपनी को मशीनों के साथ सॉफ्टवेयर, 4जी सिम कनेक्टिविटी और तकनीकी रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है। शुरुआत में प्रति मशीन 1,214 रुपए मासिक किराया तय किया गया था।
84 हजार शिकायतें, पेनाल्टी सिर्फ 27 हजार
मशीनों को लेकर वर्ष 2022 से अब तक 84 हजार से ज्यादा शिकायतें दर्ज होने का दावा है। इनमें मशीन बंद होने, सर्वर डाउन और बायोमीट्रिक रीडर काम नहीं करने जैसी समस्याएं शामिल हैं। इसके बावजूद वर्ष 2024 में कंपनी से पेनाल्टी के रूप में सिर्फ 27,218 रुपए की कटौती की गई।
176 मशीनों पर एक इंजीनियर
मशीनों के रखरखाव का काम कंपनी ने आउटसोर्स किया है। प्रदेश की 14,085 मशीनों के लिए करीब 80 इंजीनियर तैनात हैं। यानी एक इंजीनियर के हिस्से में औसतन 176 मशीनों की जिम्मेदारी है। रायपुर में सिर्फ चार इंजीनियर हैं। दूरदराज क्षेत्रों में मशीन खराब होने पर दुकानदारों को इसे ब्लॉक या जिला मुख्यालय तक ले जाना पड़ता है। मरम्मत में तीन से चार दिन लगने से राशन वितरण भी प्रभावित होता है।



