जजों की नियुक्ति पर SC ने क्यों पूछा यह सवाल… जानें

CEC Appointment: मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम टिप्पणी की. अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव आयुक्त पूरी तरह स्वतंत्र व्यक्ति होना चाहिए. चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता सिर्फ होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखाई भी देनी चाहिए.
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ 2023 के नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. इसी दौरान अदालत ने पूछा, क्या आज सच में जज ही जजों को चुनते हैं. यह टिप्पणी उस दलील के बाद आई, जिसमें कहा गया था कि कार्यपालिका और विधायिका जनता के प्रति सीधे जवाबदेह होती हैं.
चयन समिति पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मौजूदा चयन समिति में 3 सदस्य हैं. इनमें 2 सदस्य सरकार की ओर से होते हैं, जबकि 1 सदस्य विपक्ष की ओर से होता है. अदालत ने कहा कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है, लेकिन यह भी दिखना चाहिए कि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है.
अब आगे क्या होगा
केंद्र सरकार ने इस मामले को संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत 5 जजों की बड़ी पीठ के पास भेजने की मांग की है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है. इसके बाद ही यह तय होगा कि मामले की सुनवाई बड़ी पीठ करेगी या नहीं.
क्या है पूरा विवाद
2023 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री वाली समिति करती है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर रखा गया है, जिससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है. इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है.



