अंबिकापुर : महामाया दरबार में उमड़ी आस्था की भीड़, पहले दिन 5400 ज्योति कलश प्रज्जवलित - realtimes
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अंबिकापुर : महामाया दरबार में उमड़ी आस्था की भीड़, पहले दिन 5400 ज्योति कलश प्रज्जवलित

अंबिकापुर। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सरगुजा जिले के आसपास के शक्तिपीठों में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अंबिकापुर स्थित मां महामाया मंदिर से लेकर दुर्गा और काली मंदिरों तक सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। विशेष पूजा-अर्चना और ज्योति कलश प्रज्ज्वलन के साथ नौ दिवसीय पर्व की भव्य शुरुआत हुई।

चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही मां महामाया मंदिर सहित शहर के प्रमुख शक्तिपीठों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह तड़के 4 बजे परंपरा के अनुसार बैगा ने प्रथम पूजा की, जिसके बाद पुजारियों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए।

सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लग गया, जो दोपहर बाद तक जारी रहा। नवरात्रि के दौरान मंदिर के पट पूरे दिन खुले रहेंगे, जिससे दूर-दराज से आने वाले भक्तों को दर्शन में सुविधा मिल सके।

5400 से अधिक ज्योति कलश प्रज्जवलित
नवरात्रि के पहले दिन मां महामाया मंदिर में 5400 से अधिक मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित किए गए। इनमें लगभग 3600 तेल ज्योति और 1800 से अधिक घी ज्योति शामिल हैं। इसके साथ ही दुर्गा मंदिर, काली मंदिर और अन्य शक्तिपीठों में भी श्रद्धालुओं ने ज्योति कलश जलाकर मनोकामनाएं मांगीं।

हर मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें
गांधी चौक स्थित दुर्गा मंदिर, सांडबार का वनदेवी मंदिर, हरकेवल दास दुर्गा मंदिर और शहर के विभिन्न काली मंदिरों में भी सुबह से ही श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे। कई मंदिरों में दोपहर तक लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा वातावरण “जय माता दी” के जयकारों से गूंजता रहा।

नवरात्रि के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मां महामाया मंदिर और अन्य प्रमुख मंदिरों में पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। मंदिर परिसर में चारपहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। श्रद्धालुओं को चांदनी चौक के रास्ते मंदिर पहुंचने की व्यवस्था दी गई है। वहीं दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

शहर में यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

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