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छत्तीसगढ़ लोकसभा चुनाव 2024: जातिगत समीकरणों का खेल

छत्तीसगढ़ में 11 लोकसभा सीटों के लिए चुनाव की घोषणा के बाद, राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। इस बार कांग्रेस ने जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने उम्मीदवारों का चयन किया है।
कांग्रेस ने 7 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिनमें से 4 ओबीसी, 1 सामान्य, 1 एससी और 1 एसटी उम्मीदवार हैं।
भाजपा ने पहले ही सभी 11 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। 6 सामान्य सीटों में से 3 ओबीसी उम्मीदवार हैं।
कांग्रेस ने कुछ प्रमुख बदलाव किए हैं:
- पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दुर्ग से बदलकर राजनांदगांव से उतारा गया है।
- दुर्ग के पूर्व सांसद ताम्रध्वज साहू को महासमुंद से टिकट दिया गया है।
- रायपुर संभाग के पूर्व मंत्री डा. शिव डहरिया को जांजगीर-चांपा से मैदान में उतारा गया है।
- बस्तर से कवासी लखमा को टिकट दिया गया है।
कांग्रेस का लक्ष्य:
- जातिगत समीकरणों को साधकर अधिक से अधिक सीटें जीतना।
- बड़े नेताओं को मैदान में उतारकर मतदाताओं को आकर्षित करना।
भाजपा की रणनीति:
- अपने गढ़ों को बचाए रखना।
- कांग्रेस के कमजोर क्षेत्रों में सेंध लगाना।
कुछ महत्वपूर्ण सीटें:
- राजनांदगांव: ओबीसी बहुल सीट, कांग्रेस ने भूपेश बघेल को उतारा है।
- जांजगीर-चांपा: एससी आरक्षित सीट, कांग्रेस ने डा. शिव डहरिया को उतारा है।
- महासमुंद: सामान्य सीट, ओबीसी बहुल, कांग्रेस ने ताम्रध्वज साहू को उतारा है।
- दुर्ग: सामान्य सीट, ओबीसी बहुल, कांग्रेस ने राजेंद्र साहू को उतारा है।
- कोरबा: सामान्य सीट, आदिवासी बहुल, कांग्रेस ने ज्योत्सना महंत को उतारा है।
- रायपुर: सामान्य सीट, कुर्मी, साहू और सतनामी वोटर निर्णायक भूमिका में, कांग्रेस ने विकास उपाध्याय को उतारा है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि जातिगत समीकरणों का खेल चुनावी परिणामों को कैसे प्रभावित करता है।



