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चुनावी बॉन्ड डाटा: खुलासा हुआ, लेकिन सवाल बरकरार

नई दिल्ली. चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनावी बॉन्ड से जुड़ा डाटा अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। यह डाटा दो फाइलों में है:
- पहली फाइल: किस व्यक्ति/कंपनी ने किस तारीख को कितने-कितने रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे।
- दूसरी फाइल: किस राजनीतिक पार्टी ने किस तारीख को कितने-कितने रुपये के बॉन्ड भुनाए।
हालांकि, डेटा में एक महत्वपूर्ण जानकारी गायब है: कौन सी कंपनी ने किस पार्टी को कितना चंदा दिया।
मामला:
- 15 फरवरी: सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार दिया।
- 6 मार्च: SBI को चुनाव आयोग को डाटा देना था।
- 13 मार्च: डाटा सार्वजनिक करना था।
- 11 मार्च: SBI ने 30 जून तक का समय मांगा, कोर्ट ने मना कर दिया।
- 12 मार्च: SBI ने डाटा चुनाव आयोग को दिया।
- 15 मार्च: चुनाव आयोग ने डाटा सार्वजनिक किया।
डाटा पर सवाल:
- हर बॉन्ड पर यूनिक नंबर होता है, जिससे पता चल सकता है कि किस बॉन्ड को किस पार्टी ने भुनाया।
- SBI ने यह जानकारी नहीं दी, जिससे सुप्रीम कोर्ट का फैसला अधूरा रह गया।
- लोगों को यह जानने का हक है कि पार्टियों को पैसा कहां से मिला।
चुनावी बॉन्ड:
- एक सादा कागज, जिस पर नोटों की तरह उसकी कीमत छपी होती थी।
- कोई भी व्यक्ति या कंपनी खरीदकर अपनी मनपसंद राजनीतिक पार्टी को चंदे के तौर पर दे सकती थी।
- बॉन्ड खरीदने वाले की जानकारी केवल SBI के पास रहती थी।
- 2017 में घोषित, 2018 में लागू।
चुनाव बॉन्ड पर सवाल:
- गोपनीयता: बॉन्ड भुनाने वाली पार्टी को दानकर्ता का नाम नहीं बताना होता था।
- मनी लॉन्ड्रिंग और सत्ताधारी पार्टी को अनुचित लाभ की आशंका।
निष्कर्ष:
चुनावी बॉन्ड डाटा सार्वजनिक करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन डेटा में महत्वपूर्ण जानकारी गायब है। यह डेटा चुनावों में पारदर्शिता लाने में कितना सफल होगा, यह समय ही बताएगा।



