उमस के कारण बिजली की खपत 45 सौ मेगावाट पार - realtimes
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उमस के कारण बिजली की खपत 45 सौ मेगावाट पार

रायपुर(realtimes) अपने राज्य छत्तीसगढ़ में मानसून पूरी तरह से सक्रिय न होने के कारण हो रही उमस के कारण प्रदेश में बिजली की खपत इस समय 45 सौ मेगावाट पार हो गई है। आमतौर पर बारिश होने के बाद खपत चार हजार मेगावाट से कम हो जाती है। लेकिन उमस के कारण लोग अब भी एसी और कूलर चला रहे हैं जिसके कारण बिजली की खपत ज्यादा हो रही है। जहां तक छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी के उत्पादन संयंत्रों में कोयले के स्टॉक का सवाल है तो यहां पर मानसून को देखते हुए भरपूर मात्रा में कोयले का स्टॉक है।
प्रदेश में एक तो मानसून पहले ही विलंब से आया और अब बारिश तो हो रही है, लेकिन यह बारिश लगातार न होने के कारण उमस ने लोगों को परेशान कर दिया है। आमतौर पर जुलाई के माह में उमस के कारण बिजली की खपत बढ़ जाती है। इस साल भी यही हो रहा है। उमस के कारण बिजली की खपत लगातार कम ज्यादा हो रही है। इस समय खपत 45 से 46 सौ मेगावाट तक जा रही है। मानसून के समय में बिजली की खपत लगातार बारिश होने पर 35 सौ से चार हजार मेगावाट के बीच रहती है। इस समय कृषि पंप न चलने से जरूर राहत है। कृषि पंपों पर ही हर रोज करीब सात सौ मेगावाट बिजली लग जाती है। गर्मी के समय में इस बार खपत 59 सौ मेगावाट के करीब पहुंची थी।
संयंत्रों में भरपूर कोयला
मानसून के लिए उत्पादन संयंत्रों में कम से कम 15 दिनों का स्टॉक रखना पड़ता है। कई बार बारिश में जब खदानों में पानी भर जाता है तो कोयला नहीं मिल पाता है। ऐसे समय में बिजली का उत्पादन प्रभावित हो जाता है। यही वजह है कि पॉवर कंपनी बारिश से पहले जितना ज्यादा से ज्यादा स्टॉक संभव होता है, वह अपने संयंत्रों रखने का काम करती है। स्टॉक को देखते हुए अब खदानों में पानी भरा तो भी परेशानी होने वाली नहीं है। पावर कंपनी के कोरबा वेस्ट में 120 मेगावाट के चार और पांच सौ मेगावाट की एक यूनिट है। इस संयंत्र में एसईसीएल की खदान से कोयला सीधे कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से आता है। यही वजह है कि यहां के संयंत्र में परेशानी नहीं होती है। इस संयंत्र में आमतौर पर एक सप्ताह का कोयले का स्टॉक पर्याप्त माना जाता है। इस समय यहां पर इतने दिनों का ही स्टॉक है। पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी संयंत्र में 250 मेगावाट की दो यूनिट है। इसमें रोज 8 हजार टन कोयला लगता है। इस संयंत्र में भी भरपूर स्टॉक है। मड़वा में 500 मेगावाट की दो यूनिट है। यहां पर कोयला पॉवर कंपनी की खुद की गारे पेलमा की खदान से आता है। यहां पर रोज 15 हजार टन कोयला लगता है। यहां भी पर्याप्त स्टॉक है।

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