सब्जियों की महंगाई का ऐसा वार, किराना का कम हो गया रोज तीन करोड़ का थोक कारोबार - realtimes
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सब्जियों की महंगाई का ऐसा वार, किराना का कम हो गया रोज तीन करोड़ का थोक कारोबार

रायपुर(realtimes) देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी हरी सब्जियों की महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही है। इसका असर आम जनता पर ताे पड़ हगी रहा है, साथ ही दूसरे कारोबार पर भी पड़ रहा है। अब अपने ही राज्य छत्तीसगढ़ काे ले लें। यहां पर किराना सामान पर बड़ा वार  हुआ है। खासकर तेल और मसालों की खपत में बड़ी गिरावट आने के कारण डूमरतराई के थोक बाजार में रोज का करीब तीन करोड़ का कारोबार प्रभावित हो गया है। यहां पर रोज दस से 12 करोड़ का कारोबार होता लेकिन अब रोज 9 करोड़ के आस-पास ही कारोबार हो रहा है। एक तरफ जहां टमाटर थोक में सौ रुपए पहुंच गया है, वहीं बाकी सब्जियों के दाम भी आसमान पर हैं। मसालों की कीमत भी आंसू निकालने का काम कर रही है। सबसे ज्यादा कीमत जीरा की है। यह अब थोक में सात सौ रुपए और चिल्हर में दो सौ रुपए पॉव यानी आठ सौ रुपए किलो हो गया है।

मानसून के बाद से सब्जियों के दाम दो से पांच गुना तक बढ़े हैं। जो टमाटर पिछले माह तक 15 से 20 रुपए किलो में बिक रहा था, वह अब थोक में 100 रुपए और चिल्हर में 120 से 130 रुपए किलो हो गया। इसी तरह से हरा धनिया जो कुछ समय पहले 15 से 20 रुपए एक पॉव और 50 रुपए किलो में मिल रहा था, वह थोक में तो सौ रुपए किलो है, पर चिल्हर में भारी लूट है। कहीं 40 तो कहीं 50 रुपए पांव में बेचा जा रहा है। अदरक की कीमत 30 रुपए पॉव से डबल होकर 60 रुपए पॉव हो गई है। हालांकि थोक में अदरक की कीमत कुछ कम होकर 170 से 180 रुपए हो गई है, लेकिन चिल्हर में इसकी कीमत कम नहीं हो रही है। परवल जैसे सब्जी की कीमत 30 रुपए पॉव और 120 रुपए किलो है। करेला 80 से 100 रुपए किलो हो गया है। मूली की कीमत 60 रुपए किलो हो गई है। गाजर 80 रुपए किलो, कुंदरू और भिंडी की कीमत 60 से 80 रुपए किलो पहुंच गई है। कोचई की कीमत 50 रुपए से बढ़कर 80 रुपए हो गई है। हरी मिर्च जो पहले 15 रुपए पॉव थी, वह अब 30 रुपए पॉव हो गई है। फूल गोभी 100 रुपए, पत्ता गोभी 60 रुपए किलो है। भाटा 80 रुपए किलो, गंवार फल्ली सौ रुपए किलो है।
तेल, मसालों की खपत आधी
हरी सब्जियों के दाम का सबसे बड़ा असर किराना सामानों पर पड़ा है। इसमें भी सबसे ज्यादा असर तेल और मसालों पर पड़ा है। इसकी खपत आधी हो गई है। कारोबारियों के मुताबिक हरी सब्जियों को बनाने में तेल और मसालों का ज्यादा उपयोग होता है। लेकिन सब्जियों के दाम ज्यादा होने पर लोगों से हरी सब्जियों के स्थान पर दालों के साथ चना, काबुली चना, झुरगा, राजमा, सोयाबीन बड़ी, रखिया बड़ी सहित अन्य सूखी सब्जियों का रुख किया है। ऐसा होने से तेल और मसालों की डूमरतराई के थोक बाजार में खपत आधी हो गई है। जो कारोबारी पहले 10 से 20 टिन तेल ले जाते थे, वे मुश्किल से 5 से 10 टिन ले रहे हैं। इसी तरह से पाउच में किलो वाली पेट्टी की खरीदारी भी आधी हो गई है। मसालों की बिक्री भी 40 फीसदी तक कम हो गई है। लेकिन दालों के साथ सूखी सब्जियों की खपत 25 से 30 फीसदी बढ़ गई है।
दालों की कीमत भी सौ के पार
दालों एक चना दाल को छोड़कर बाकी की कीमत सौ के पार है। राहल दाल की कीमत थोक में इस समय 135 से 140 और चिल्हर में 150 रुपए है। अन्य दालों की बात करें तो चना दाल ही कीमत ही इस समय सबसे कम है। यह थोक में 65 और चिल्हर में 70 से 75 रुपए है। उड़द दाल थोक में 90 से 95 और चिल्हर में 100 से 110 रुपए है। उड़द दाल धुली थोक में 105 और चिल्हर में 115 रुपए है। मूंग दाल थोक में 100 से 110 और चिल्हर में 120 से 130 रुपए है। काबुली चना की कीमत बढ़ी है। थोक में यह 135 से 140 और चिल्हर में 150 से 160 रुपए बिक रहा है।

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