खबर का असर: पावर कंपनियां को नया रायपुर शिफ्ट करने में होंगे 200 करोड़ से ज्यादा खर्च, कर्मचारियों ने विरोध में खोला मोर्चा

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनियों काे नवा रायपुर शिफ्ट करने पर दाे साै करोड़ से ज्यादा का खर्च हाेगा। इसको लेकर अब विरोध प्रारंभ हो गया है। छत्तीसगढ़ रिटायर्ड पावर इंजीनियर्स-आफिसर्स एसोसिएशन ने इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। अपने पत्र में एसोसिएशन ने बताया है कि डगनिया के मुख्यालय में अब भी बहुत स्थान है, अगर और दफ्तरों की जरूरत है तो यहां पर महज पांच करोड़ खर्च करके काम चल सकता है, इसके बदले नवा रायपुर में दो सौ करोड़ खर्च करके नया भवन बनाने की जरूरत नहीं है। रियल टाइम्स ने 9 जुलाई काे पावर कंपनियों को नया शिफ्ट करने की खबर का प्रकाशन किया था। इसका असर यह हुआ है कि अब इसका विराेध प्रारंभ हाे गया है।
पावर कंपनी की पहले से नवा रायपुर के सेक्टर 24 में छह हजार वर्ग मीटर जमीन है। वहां पर पावर कंपनी ने एनआरडीए से चार हजार वर्ग मीटर जमीन और ली है। कुल मिलाकर दस हजार वर्ग मीटर में भवन बनाकर कंपनियों को नवा रायपुर ले जाया जाएगा। डीपीआर बनाने के लिए सलाहकार नियुक्त करने की भी प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसके लिए टेंडर भी हाे गया है। दो साल पहले भी इसी तरह से पावर कंपनी के दो दफ्तरों को नवा रायपुर ले जाने के लिए एनआरडीए की नवा रायपुर में बनी बिल्डिंग में स्थान लेकर दफ्तर शिफ्ट करने का प्रयास किया गया था, तब भी इसका विरोध होने पर मामला अटक गया था। अब नए तरीके से कवायद प्रारंभ की गई है। इस बार जमीन लेकर उसमें नया भवन बनाने की तैयारी है। इसका भी विरोध प्रारंभ हो गया है।
फिजूलखर्ची से बढ़ेगा उपभोक्ता पर भार
छत्तीसगढ़ रिटायर्ड पावर इंजीनियर्स-आफिसर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर इस मामले की पूरी जानकारी देते हुए बताया है कि पॉवर कंपनी ने नवा रायपुर में जमीन के लिए जहां दो करोड़ दिए हैं, वहीं करीब दो सौ करोड़ की योजना नए भवनों के लिए बनाई जा रही है। पत्र में लिखा गया है, डगनिया के मुख्यालय में बहुत स्थान है। यहां पर कुछ नए दफ्तरों के लिए निर्माण कार्य चल रहा है। अगर और दफ्तरों की भी जरूरत होगी तो और नए दफ्तर बन जाएंगे। इसके लिए दो सौ करोड़ खर्च करने से इसका भार उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इसी के साथ अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ बाहर से अपने काम के लिए आने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि सबको नवा रायपुर जाना पड़ेगा।
शासन की छवि खराब होने का भी हवाला
पत्र में शासन की छवि भी खराब होने का हवाला दिया गया है। पत्र में इस बात का भी उल्लेख है कि मुख्यालय की जमीन खाली होने से इसका फायदा भू-माफिया को होगा। ऐसे में इस मामले में मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करके पूरी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
करोड़ों की है मुख्यालय की पुरानी जमीन
डगनिया के मुख्यालय की जमीन करोड़ों की है। पहले जब कंपनियों को शिफ्ट करने की तैयारी थी, तब यह बात सामने आ रही थी कि यहां की जमीन को बेचकर यहां पर कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी है। अब एक बार फिर से यही चर्चा हो रही है कि जब पावर कंपनी का मुख्यालय नया रायपुर शिफ्ट हो जाएगा तो पुरानी जमीन का क्या उपयोग होगा।



