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मुख्यमंत्री गहलोत ने सचिन पायलट के बीच अनबन को लेकर कही यह बात?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं गहलोत गुट और पायलट गुट के बीच चल रही नाराजगी को इस चुनावी साल में खत्म करने की नई कोशिश की जा रही है। सचिन पायलट के साथ अनबन के बारे में पूछे जाने पर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा: “हालांकि हमारी पार्टी के भीतर छोटे-छोटे मतभेद हैं, यह हर राज्य में सभी दलों में आम है। हम साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे, जीतेंगे और सरकार बनाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हमारी पार्टी के भीतर विवाद का कोई बड़ा मुद्दा नहीं है।”

शनिवार को मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि हम सब मिलकर चुनाव लड़ेंगे, जीतेंगे और फिर मुख्यमंत्री पद को लेकर आलाकमान के फैसले को मानेंगे। हमारी पार्टी में कोई मतभेद नहीं है और हम एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे।

 

पायलट और गहलोत के बीच के मतभेद पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं। पिछले साल कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ कड़े बयान दिए थे, गहलोत ने पायलट को देशद्रोही तक कह दिया था। इससे पहले गहलोत ने 2020 में पायलट की बगावत के दौरान उन्हें ‘निकम्मा’ और ‘नकारा’ कहा था।
कांग्रेस के कई नेता राजस्थान में पार्टी का गढ़ बनाए रखने के लिए गहलोत और पायलट के बीच लंबे समय से चली आ रही नाराजगी को खत्म करना चाहते हैं।  सीनियर नेता सलमान खुर्शीद ने गहलोत और पायलट दोनों को अपने मतभेदों को सुलझाने और एकजुट होने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, ‘अगर हम ऐसा कर पाए तो हम बच जाएंगे और जिन राज्यों में हमारी पार्टी कमजोर है, वहां यह संदेश जाएगा कि जहां हमारे किले मजबूत हैं, वहां हमारी पार्टी भी मजबूत है। अगर राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में हमारे किले मजबूत रहेंगे तो निश्चित तौर पर इसका असर यूपी जैसे अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और सचिन पायलट के ससुर फारूक अब्दुल्ला ने भी राजस्थान कांग्रेस से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि “गहलोत सरकार ने अच्छा काम किया है, लेकिन कांग्रेस को सत्ता में लाने के लिए सभी नेताओं को साथ लेना होगा “।
गहलोत ने विधानसभा चुनाव के लिए अनौपचारिक रूप से अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। इसके बावजूद सचिन पायलट पिछले कुछ हफ्तों से चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे उनके अगले कदम को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या वह विधानसभा चुनाव से पहले आलाकमान और वरिष्ठ नेताओं के एकजुट रहने की अपील को मानेंगे या नहीं।

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