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कोरबा में लगेंगे 660 मेगावाट के दो नए बिजली संयंत्र,  पॉवर कंपनी की क्षमता होगी 43 सौ मेगावाट

रायपुर(realtimes) राज्य सरकार इस समय बिजली उत्पादन की क्षमता काे विशाल बनाने की दिशा में काम कर रही है। जहां एक तरफ पानी से 7700 मेगावाट बिजली बनेगी वहीं, छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ राज्य उत्पादन कंपनी के कोरबा पश्चिम में 660 मेगावाट के दो संयंत्र लगेंगे। इसके पहले सबसे बड़े दो संयंत्र 500-500 मेगावाट के मड़वा में लगे थे। कोरबा पश्चिम में पॉवर कंपनी के पास अपनी जमीन भी है। यहां पर 60 साल पुराने 50 मेगावाट के चार और 120 के दो संयंत्र प्रदूषण के कारण बंद हो चुके हैं। अब उसी स्थान पर नए संयंत्र लगाने की तैयारी है। इसके लिए राज्य सरकार ने पहले ही मंजूरी दे दी है। अब इसको लेकर उत्पादन कंपनी तैयारी कर रही है। इसका निर्माण करने से पहले कोयला, पानी और पर्यावरण की मंजूरी के लिए प्रयास चल रहे हैं। इसकी मंजूरी मिलने के बाद योजना पर काम प्रारंभ होगा। नए संयंत्र बनने के बाद पॉवर कंपनी की अपने संयंत्रों की उत्पादन क्षमता 43 सौ मेगावाट हो जाएगी। क्षमता बढ़ने के बाद जहां लंबे समय तक बिजली की कमी नहीं होगी।अलग राज्य बनने के बाद 2000 में राज्य में बिजली के मामले में ज्यादा सुविधाएं नहीं थीं। उत्पादन के मामले में यहां पर महज 1360 मेगावाट का ही उत्पादन होता था। लेकिन आज की स्थिति में यह उत्पादन 2980 मेगावाट हो गया है। मड़वा में जो 500 मेगावाट की दो यूनिट लगी है, उस यूनिट में जब करीब आठ साल पहले उत्पादन प्रारंभ हुआ था, तभी से उसकी बिजली तेलंगाना को देने का अनुबंध हो गया था। ऐसा इसलिए संभव हो सका, क्योंकि उत्पादन के मामले में राज्य सरप्लस हो गया था। आज की स्थिति में जहां अपना उत्पादन 2980 मेगावाट है, वहीं सेंट्रल सेक्टर से करीब साढ़े तीन हजार मेगावाट का शेयर मिलता है। ऐसे में राज्य में बिजली छह हजार मेगावाट से ज्यादा हो जाती है। जहां तक खपत का सवाल है तो औसत खपत चार हजार मेगावाट के आस-पास रहती है। कई बार गर्मी में खपत पांच हजार मेगावाट के पार हो जाती है, लेकिन इसके बाद भी बिजली की कमी नहीं होती है।
अब नए संयंत्र की तैयारी
जिस तरह से तेजी से प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या में इजाफा हो रहा है, उससे आने वाले समय में बिजली की बहुत ज्यादा जरूरत होगी। आज उपभोक्ताओं की संख्या 61 लाख से ज्यादा हो गई है। पहले बिजली की खपत राेज तीन हजार मेगावाट से भी कम रहती थी, आज खपत पांच हजार के पार जा रही है। यह खपत कभी भी छह हजार मेगावाट से ज्यादा हो सकती है। प्रदेश सरकार ने एक दशक की खपत को देखते हुए ही योजना बनाकर कोरबा में 660 मेगावाट के दो संयंत्र लगाने की मंजूरी दी है। उत्पादन कंपनी के अधिकारियों का कहना है, संयंत्र का काम प्रारंभ करने से पहले जहां इसके लिए पर्यावरण की मंजूरी जरूरी है, वहीं यह भी जरूरी है कि इसके लिए कोयले की आपूर्ति कहां से होगी, यह भी तय किया जाए। इन कामों को लेकर ही पहले मंजूरी लेने का काम किया जा रहा है। इसकी मंजूरी मिलते ही टेंडर पर काम होगा।

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