खास खबर:उत्पादन, वितरण कंपनी के डगनिया के दफ्तरों काे लगेगा किराए का करंट

रायपुर(realtimes) डगनिया मुख्यालय में उत्पादन और वितरण कंपनी के जो दफ्तर हैं अब उनको वहां रहने के लिए किराया चुकाना पड़ेगा। अब तक मुफ्त में रह रही कंपनियों से ट्रांसमिशन कंपनी किराया वसूलेगी, हालांकि यह किराया बहुत कम हाेगा। ट्रांसमिशन कंपनी काे किराया लेने का अधिकार इसलिए मिला है, क्योंकि यहां की संपत्ति उसी कंपनी के नाम है। इसको लेकर प्रक्रिया चल रही है, जल्द ही इस पर फैसला होगा कि किससे कितना किराया लिया जाएगा।
पहले छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनीज की पांच कंपनिया थीं, जिनके दफ्तर डगनिया में थे। लेकिन अब दो कंपनियों के विलय के बाद वहां पर तीन कंपनियों के दफ्तर ही बचे हैं। कंपनियों के विलय के बाद राजपत्र में ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकार और उनके कार्यों के बारे में प्रकाशन हो चुका है। उसमें इस बात का उल्लेख है ट्रांसमिशन कंपनी ही गुुढ़ियारी, डगनिया और दिल्ली कार्यालय भवन का किराया लेने का काम करेगी। इसके बाद ये लगने लगा था कि संपत्ति ट्रांसमिशन कंपनी की है तो बाकी दफ्तर नया रायपुर शिफ्ट हो सकते हैं। क्योंकि पहले भी इसकी योजना बनाई गई थी।
नवा रायपुर शिफ्ट करने की बनी थी याेजना
एनआरडीए द्वारा लोन की किस्त नहीं चुकाने की वजह से यूनियन बैंक ने एनआरडीए के खिलाफ नए साल के पहले ही माह में कुर्की की कार्रवाई शुरू की। इसे रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने रायपुर के कुछ सरकारी दफ्तरों को नया रायपुर ले जाने की तैयारी की थी। सबसे पहले राज्य की विद्युत उत्पादन कंपनी का नाम सामने आया था। तब छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी में उत्पादन, पारेषण, वितरण, होल्डिंग और ट्रेडिंग को मिलाकर कुल पांच कंपनियां थीं। पांचों कंपनियां रायपुर स्थित डगनिया मुख्यालय में संचालित होती हैं। यहां से उत्पादन कंपनी को अलग कर नया रायपुर में शिफ्ट करने की तैयारी की गई थी, इसके लिए योजना बना ली गई, लेकिन इसका कर्मचारी संघों ने विरोध किया और मोर्चा खोल दिया, तो मामला अटक गया। इसके बाद दो कंपनियों ट्रेडिंग और होल्डिंग का विलय करने का फैसला हुआ और इसका विलय भी कर दिया गया है। इस विलय के कारण ही पहले दूसरी कंपनियों को नया रायपुर शिफ्ट करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं है।



