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‘मुझसे उम्मीदें ज्यादा, लेकिन मैं चमत्कार करने नहीं आया’- चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़

नई दिल्ली
CJI DY Chandrachud सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने जिला न्यायपालिका के प्रति औपनिवेशिक मानसिकता व अधीनता की संस्कृति त्यागने का आह्वान किया। चीफ जस्टिस ने कहा देश को अधिक आधुनिक और समान न्यायपालिका की ओर बढ़ने की जरूरत है। नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को कहा, वह जानते हैं कि उनसे काफी उम्मीदें हैं, लेकिन वह यहां चमत्कार करने नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में वह सुप्रीम कोर्ट में अपने सहयोगियों को देखेंगे और उनके अनुभव व ज्ञान से लाभ प्राप्त करेंगे, जिसका पारंपरिक रूप से उपयोग नहीं किया गया है।

मैं यहां चमत्कार करने के लिए नहीं हूं- CJI
जस्टिस चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्टों के न्यायाधीशों से जिला अदालतों के न्यायाधीशों के साथ आचरण में औपनिवेशिक मानसिकता और अधीनता की संस्कृति छोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि देश को अधिक आधुनिक और समान न्यायपालिका की ओर बढ़ने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा सीजेआइ के रूप में नियुक्ति पर अभिनंदन के लिए आयोजित समारोह में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘कुल मिलाकर, मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि मैं यहां चमत्कार करने नहीं आया हूं। मुझे पता है कि चुनौतियां अधिक हैं, शायद अपेक्षाएं भी अधिक हैं और मैं आपके विश्वास की भावना का बहुत आभारी हूं, लेकिन मैं यहां चमत्कार करने के लिए नहीं हूं।’
 
हर दिन मेरा आदर्श वाक्य है- CJI
उन्होंने कहा, ‘हर दिन मेरा आदर्श वाक्य है कि अगर यह मेरे जीवन का आखिरी दिन होता, तो क्या मैं दुनिया को एक बेहतर जगह के तौर पर छोड़ता। मैं हर दिन खुद से यही पूछता हूं।’ न्यायपालिका में रिक्तियों पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिला अदालतों में 25 प्रतिशत पद खाली हैं, हाई कोर्टों में 30 प्रतिशत और शीर्ष अदालत में कुछ सीटें खाली हैं और उन्हें योग्यता के आधार पर भरा जाएगा।

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