ताराें काे अंडरग्राउंड करने की याेजना अब खटाई में

रायपुर(realtimes) राजधानी रायपुर के कई मार्गों के बिजली तारों को अंडरग्राउंड करने की योजना अब पूरी तरह से खटाई में पड़ गई है। पॉवर कंपनी से योजना वापस लेने के लिए अब स्मार्ट सिटी ने योजना के लिए दिए गए 31 करोड़ रुपए वापस मांगे हैं। पॉवर कंपनी ने योजना के लिए जो टेंडर किया था, उनको अबब रेट के कारण रद्द करना पड़ा। इसके बाद अब तक वापस टेंडर नहीं किया गया है। लेकिन अब स्मार्ट सिटी ने पॉवर कंपनी से योजना ही वापस लेने का फैसला कर लिया है।राजधानी रायपुर के ज्यादातर मार्गों में बिजली के तारों का जाल बिछा हुआ है। इसकी वजह से बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर बाजारों के तारों से ज्यादा परेशानी होती है। करीब डेढ़ दशक पहले बाजारों को तारों से मुक्त करने की योजना बनाई गई, लेकिन यह योजना पूरी नहीं हो सकी। अब एक बार फिर से योजना बनाई गई और इस बार फिर से योजना फेल हो गई है। योजना के लिए स्मार्ट सिटी ने पहले पॉवर कंपनी को 25 करोड़ दिए। इसके बाद इसकी लागत में छह करोड़ का इजाफा होने की बात की गई तो फिर से स्मार्ट सिटी ने छह करोड़ और दिए। ऐसे में योजना 31 करोड़ की हो गई।
जांच में टेंडर में मिली गड़बड़ी तो किया रद्द
31 करोड़ की योजना का टेंडर करने के बाद टेंडर को अबब में भरने वाली प्रदेश की ही एक कंपनी को देने की तैयारी थी। तीन कंपनियों ने योजना में टेंडर भरा था। बताया जा रहा है, सभी कंपनियों का रेट अबब में भरा गया। ऐसे में जिस कंपनी का सबसे कम अबब वाला रेट था, उस कंपनी का टेंडर फाइनल करने के लिए टेंडर को पॉवर कंपनी के वित्त विभाग के पास मंजूरी के लिए भेजा गया। अबब वाले टेंडर को मंजूरी के लिए भेजने पर वित्त विभाग को हैरानी और गड़बड़ी की आशंका भी हुई। इस मामले जांच करने का फैसला किया गया और जांच करने पर पाया गया कि किसी एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है, इसलिए वित्त विभाग ने टेंडर को मंजूर करने के स्थान पर रद्द कर दिया। टेंडर के रद्द होने के बाद वापस टेंडर करने की तैयारी थी, लेकिन अचानक स्मार्ट सिटी ने योजना के लिए दिए गए पैसे वापस मांग लिए हैं।



