रायपुर(realtimes) सरिया की कीमत एक बार फिर से आसमान पर है। इस समय कीमत 65 हजार के पार है। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण काेयला है। राज्य के उद्योगों काे देशी काेयला मिल ही नहीं रहा है। कोयला संकट से जूझ रहे उद्योगों को अब तक राहत नहीं मिल सकी है। कोल मंत्री प्रहलाद जोशी के पत्र के बाद भी अब तक कोल इंडिया ने प्रदेश के स्पंज आयरन उद्योग के लिंकेज पर कोई फैसला नहीं किया है। ऐसे में उद्योगों को महंगे विदेशी कोयले से ही काम चलना पड़ रहा है अब उद्योगों ने देशी कोयले के लिए दीपावली के बाद रेल रोकने के साथ ही एसईसीएल के दफ्तर का घेराव करने का फैसला किया है।
प्रदेश के स्पंज आयरन उद्योगों को भी कोल इंडिया के एसईसीएल से कोयला मिलता है। इनका पांच साल का लिंकेज समाप्त हो गया है। ऐसे में इनको इस साल अप्रैल से कोयला मिलना बंद हो गया है। इसको लेकर भारी संकट की स्थिति है। अगर कोल इंडिया से कोयला नहीं मिला तो उद्योगों में ताले लग जाएंगे। जिन उद्योगों का मार्च का बैकलॉक कोयला बचा था, वह मिला है। स्पंज आयरन एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल नचरानी का कहना है, अलग-अलग उद्योगों का अलग-अलग लिंकेज रहता है, लेकिन अब सभी का लिकेंज समाप्त हो गया है और किसी के पास भी लिंकेज का कोयला नहीं है। ऐसे में उद्योगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इस समय काम विदेशी कोयले से चल रहा है। इसकी कीमत ज्यादा होने से लंबे समय तक इसके भरोसे उद्योग नहीं चल सकते हैं।
आस्ट्रेलिया के कोयले से थोड़ी राहत
स्पंज आयरन और रोलिंग मिलों में विदेशी कोयले से काम चल रहा है। एक तरफ जहां दक्षिण अफ्रीका से आने वाला कोयला 16 हजार रुपए टन मिल रहा है, वहीं अब आस्ट्रेलिया से भी कोयला आ रहा है, इसकी कीमत 13 हजार रुपए टन होने से थोड़ी राहत है। यही वजह है कि छोटे उद्योग भी अभी चल रहे हैं, लेकिन उत्पादन सभी ने आधा कर दिया है।
सरिया हो जाएगा पांच हजार कम
विदेशी कोयले के कारण ही इस समय सरिया की कीमत 65 हजार रुपए टन हो गई है। एक समय तो इसकी कीमत 70 हजार तक चली गई थी। लेकिन अब आयरन ओर, स्पंज आयरन और कोयले की कीमत कुछ कम होने से कीमत कम हुई है। स्पंज आयरन एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल नचरानी का कहना है, अगर लिकेंज का कोयला मिलने लगे तो सरिया की कीमत में पांच हजार की कमी हो जाएगी।



