भाजपा का बैठकों में तिहरा शतक, पर नजर नहीं आ रही है कहीं भी जीत मिलने की धमक

रायपुर. प्रदेश भाजपा संगठन में विधानसभा चुनाव काे लेकर जीत के लिए क्या किया जाना है, इसकाे लेकर अब तक कोई रणनीति नहीं है, बस बैठकें करके जीत का मंत्र देने का काम करने की बात हाे रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर काेई याेजना नहीं है। संगठन में लबदलाव के बाद बैठकाें का तिहरा शतक हाे गया है, पर कहीं भी जीत मिलने वाली धमक नजर नहीं आ रही है।
भाजपा में पिछले करीब 180 दिनों में ही 300 से ज्यादा बैठकेें हो गई हैं। इन बैठकों के कारण पदाधिकारी परेशान होने लगे हैं। कभी राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री बैठक ले रहे हैं ताे कभी प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी बैठक ले रहे हैं ताे कभी क्षेत्रीय संगठन महामंत्री बैठक ले रहे हैं। कभी प्रदेशाध्यक्ष बैठक ले रहे हैं। अब ताे राष्ट्रीय स्वयं संघ भी बैठक लेने लगा है। कोई कुछ बोल नहीं पा रहा है, लेकिन बाहर में इसकी चर्चा हो रही है कि बैठकों से कुछ होने वाली नहीं है। जमीनी स्तर पर काम होना चाहिए।भाजपा का राष्ट्रीय संगठन इस बार होने वाले विधानसभा चुनाव में हर हाल में जीत प्राप्त करके प्रदेश में भाजपा की सरकार वापस बनाना चाहता है। इसको लेकर लगातार मशक्कत हाे रही है। इस मशक्कत में ही बड़े बदलाव किए गए और आंदोलन भी किए गए। लेकिन एक पीएम आवास काे लेकर हुए बड़े आंदोलन के अलावा और काेई बड़ा आंदोलन नहीं हाे सका है। बस कई बड़े आंदोलन और किए जाने की बात हाे रही है। लेकिन इसकाे लेकर अब तक काेई याेजना नहीं बनी है। भाजयुमो काे बेरोजगारी भत्ते और भ्रष्टाचार काे लेकर आंदोलन करने कहा गया है। इसमें भी राज्य स्तर के आंदोलन काे लेकर कोई रणनीति नहीं बनी है। महिला माेर्चा काे भी शराबबंदी पर बड़ा आंदोलन करना है, लेकिन इसकी तैयारी का भी पता नहीं है। हर मोर्चा काे अपने मोर्चा के हिसाब से रणनीति बनाकर आंदोलन करने का फरमान जारी किया गया है, लेकिन अब तक कोई रणनीति नहीं बनी है।
अजय जामवाल बैठकाें के शतकवीर
प्रदेश भाजपा में जमीनी स्तर पर कोई काम नजर नहीं आ रहा है, लेकिन बैठकें हैं की थमने का नाम नहीं ले रही हैं। क्षेत्रीय संगठन महामंत्री बनाए गए, अजय जामवाल ने सभी 90 विधानसभाओं में जाकर बैठक लीं। इसी के साथ लोकसभा के हिसाब से एक-एक टीम बनाकर बैठकों का दाैर चला। इसके लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से लेकर प्रदेशाध्यक्ष अरुण साव, नेता प्रतिपक्ष नारायण सिंह चंदेल के साथ सांसद, विधायक और प्रदेश के पदाधिकारियों की टीमें बनाकर बैठकें की गईं। ऐसे में विधानसभाओं में ही दो दौर में 180 बैठक हो गई। इसके बाद विधानसभाओं में एक बार फिर से बूथ सशक्तिकरण को लेकर दिग्गज नेताओं ने बैठक ली है। यानी विधानसभाओं में 270 बैठकें हो गईं।
माथुर के खाते में एक और नितिन के में दो दर्जन बैठकें
नए प्रदेश प्रभारी ओम माथुर भी कई जिलों में जाकर बैठक ले चुके हैं। उनकी एक दर्जन से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं। सह प्रभारी नितिन नवीन भी जिलाें का दाैर करके बैठकें ले रहे हैं। उनकी बैठकों की संख्या दो दर्जन से ज्यादा है। राजनांदगांव में प्रदेश के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसके बाद सरगुजा में प्रदेश की कार्यसमिति हुई। बस्तर में भी बैठक हाे चुकी है। कुल मिलाकर बैठकाें के अलावा कुछ हाे नहीं रहा है। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश भी आधा दर्जन बैठक ले चुके हैं। इसके अलावा संभाग, जिलाें, विधानसभा वार, मंडल, बूथों में होने वाली बैठक अलग से हैं।
पदाधिकारी परेशान
बैठकाें से पदाधिकारियों काे परहेज नहीं है, लेकिन जिस तरह से बैठकों का दौर चल रहा है, उसकाे लेकर जरूर पदाधिकारी तंग हाे गए हैं। कई पदाधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, बैंठकाें से हासिल कुछ हाेने वाली नहीं है। जमीनी स्तर पर काम करना होगा, जाे हाे नहीं रहा है। कार्यकर्ताओं में कोई उत्साह नहीं है।



