हसदेव अरण्य क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर सरकार का पक्ष

कहा- एनजीओं और प्रायोजित संस्थाएं कर रहीं है विरोध
रायपुर(realtimes) हसदेव अरण्य क्षेत्र में वर्तमान में की जा रही वृक्ष विदोहन की गतिविधि के संबंध में राज्य सरकार ने बिंदुवार पक्ष रखा है.
छत्तीसगढ़ शासन वन विभाग के द्वारा दिनांक 27 सितम्बर 2022 को परसा ईस्ट एवं केते बासेन (PEKB) चालू खदान परियोजना के Phase-II में 43.63 हे. वन भूमि में वृक्ष विदोहन का कार्य प्रारंभ किया गया। परसा ईस्ट केते बासेन चालू खदान परियोजना में उत्खनन का कार्य वर्ष 2012-13 से किया जा रहा है। केन्द्र एवं राज्य सरकार से Phase-II की स्वीकृति उपरांत वर्तमान में उत्खनन जारी रखने हेतु राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवश्यक वन भूमि प्रदान करने के उद्देश्य से वृक्ष विदोहन का कार्य प्रारम्भ किया गया है।
वर्तमान में ग्रामीणों द्वारा नई प्रस्तावित परसा कोल खदान में वृक्ष कटाई का विरोध किया जा रहा है, चूंकि परसा कोल खदान एवं परसा ईस्ट केते बासेन चालू खदान का क्षेत्र एक दूसरे से सटा हुआ है एवं दोनो की स्वीकृति पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा लगभग एक ही समय प्रदान की गई, वहां के ग्रामीणों में दोनो क्षेत्रों को लेकर कुछ बाहरी NGO’s एवं अन्य प्रायोजित संस्थाओं के द्वारा भ्रम की स्थिति निर्मित की जा रही है। ग्रामीणों का विरोध नई स्वीकृत खदानों के लिये है, जिनमें अभी किसी भी प्रकार का वृक्ष विदोहन का कार्य नही किया जा रहा है। वर्तमान में वृक्ष विदोहन का कार्य पूर्व से संचालित पुरानी खदान में ही किया जा रहा है। मई 2022 में पहले से संचालित खदान में जब वृक्ष विदोहन का प्रयास किया गया तब कुछ बाहरी NGO’s एवं प्रायोजित संस्थाओं द्वारा स्थानीय ग्रामीणों को भ्रमित करते हुये इसका प्रायोजित विरोध किया गया जिससे कानून व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई थी तत्पश्चात सुरक्षागत कारणों से वृक्ष कटाई को वन विभाग द्वारा स्थगित करना पड़ा था।
26 सितम्बर 2022 को वन विभाग द्वारा सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुये वृक्ष कटाई के लिये पुलिस बल की मांग की गई थी जिसे जिला प्रशासन द्वारा प्रदान किया गया। 27 सितम्बर 2022 को वृक्ष कटाई का कार्य शासकीय नियमों के तहत् 43.63 हे. वनभूमि में प्रारंभ किया गया। दिनांक 26 सितम्बर 2022 को स्थानीय ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने घाटबर्रा के PEKB Phase-II के लिये 43.00 हे. में उत्खनन के लिये ग्रामवासियों की सहमति होने के उपरांत वृक्ष विदोहन की कार्यवाही में कोई आपत्ति नही होने का उल्लेख किया है। मुख्यमंत्री द्वारा भी यही कहा गया था कि बिना स्थानीय विधायक की सहमति के जंगल के पेड़ तो क्या एक डंगाल भी नही कटेगा। वर्तमान में 23 सितम्बर 2022 को स्वास्थ्य मंत्री जी द्वारा ली गई प्रेस वार्ता में उन्होंने PEKB Phase-II के लिये अपनी सहमति दी थी, जिसके उपरांत ही वृक्ष विदोहन का कार्य प्रारंभ किया गया है।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विधानसभा में पारित अशासकीय संकल्प को ध्यान में रखते हुए पूर्व में ही आवश्यक कदम उठा लिए गए हैं। हसदेव नदी के प्रमुख जल संग्रहण क्षेत्र को संरक्षित करते हुए तथा हाथियों के विचरण मार्ग को ध्यान में रखते हुए 1995 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को लेमरू एलीफैंट रिजर्व घोषित कर संरक्षित कर दिया है। लेमरू एलीफैंट रिजर्व के क्षेत्र अंतर्गत आने वाली सभी नई कोल परियोजनाओं पर स्वयं ही रोक लग जायेगी। अधिसूचना का प्रकाशन भी राजपत्र में किया जा चुका है। राज्य शासन ने जनहितकारी उद्देश्य के समक्ष प्रदेश को प्राप्त हो सकने वाले राजस्व का परित्याग कर इस क्षेत्र में आने वाली नई कोल परियोजनाओं की स्थापना पर भी रोक लगा दी गई है।



