सल्फर उत्सर्जन नियमों में ढील, सऊदी से 31 लाख टन DAP खरीद का समझौता

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कोयले से बिजली बनाने वाले संयंत्रों के लिए सल्फर उत्सर्जन नियमों में ढील दे दी है। 11 जुलाई को पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना के अनुसार 79 प्रतिशत संयंत्रों को फ्लू-गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) सिस्टम लगाने से छूट दी गई है। ये ऐसे संयंत्र हैं जो प्रदूषण के हॉटस्पॉट से 10 किलोमीटर से ज्यादा दूर स्थित हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के लिए सल्फर उत्सर्जन नियमों में ढील देने से बिजली की कीमत में 25-30 पैसे प्रति यूनिट की कमी आने की उम्मीद है। सरकार के आदेश के अनुसार बाकी 11 प्रतिशत संयंत्रों की मामले-दर-मामला समीक्षा की जाएगी, जबकि 10 प्रतिशत संयंत्र जो दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों के करीब हैं, उन्हें दिसंबर 2027 तक आदेश का पालन करना होगा। वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की ओर से सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन के नियमों में छूट देने को गलत बताया। उन्होंने सरकार के इस कदम को पर्यावरण के लिए खतरा बताया है।
सऊदी अरब से 31 लाख टन डीएपी खरीद का समझौता
भारत ने सऊदी अरब माइनिंग कंपनी (मादेन) के साथ 31 लाख टन डीएपी उर्वरक खरीदने के समझौते पर हस्ताक्षर किया है। समझौते के तहत मादेन वित्त वर्ष 2025-26 और इसके बाद भारतीय उर्वरक कंपनियों को डीएपी की आपूर्ति करेगी। डीएपी (डाई अमोनियम फॉस्फेट) आपूर्ति के इस सौदे पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की सऊदी अरब यात्रा के दौरान हुआ। नड्डा के दौरे में सऊदी अरब ने भारत को उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का वादा किया।
नड्डा की यात्रा रविवार को संपन्न हो गई। दोनों ने उर्वरक क्षेत्र में लंबे समय के सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए एक संयुक्त टीम गठित करने पर भी सहमत हुए। इसके अलावा दोनों देशों ने स्वास्थ्य और चिकित्सा, दा, डिजिटल स्वास्थ्य समाधान और ज्ञान के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए भी वार्ता की।



