सरप्लस बिजली न हाे लैप्स इसके लिए बनेगा पावर मैनेजमेंट सेल

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी की सरप्लस बिजली लैप्स न हाे जाए इसको लेकर कंपनी अब गंभीर हाे गई है। सेंट्रल सेक्टर से रोज की खपत के लिए शेड्यूल करके बिजली ली जाती है, उस बिजली का पूरा उपयोग हो सके इसके लिए अब पेशेवरों की पावर मैनेजमेंट सेल बनाने की तैयारी है। कई बार ऐसा होता है कि मौसम की खराबी के कारण अचानक खपत आधी हो जाती है, ऐसे में परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर पेशेवर विशेषज्ञों की टीम होगी तो इस परेशानी से बचने में मदद मिलेगी।प्रदेश में बिजली की खपत अलग-अलग मौसम में अलग-अलग होती है। गर्मी में खपत पांच हजार मेगावाट से ज्यादा हो जाती है। जहां तक अपने उत्पादन का सवाल है तो पावर कंपनी के उत्पादन संयंत्रों की क्षमता 2960 मेगावाट है। लेकिन आमतौर पर अपना उत्पादन 22 से 26 सौ मेगावाट तक होता है। ऐसे में बिजली की पूर्ति करने के लिए सेंट्रल सेक्टर से बिजली ली जाती है। सेंट्रल सेक्टर का छत्तीसगढ़ का शेयर साढ़े तीन हजार मेगावाट तक का है। इतनी बिजली रोज ले सकते हैं।
15-15 मिनट के दिन भर में 96 शेड्यूल
सेंट्रल सेक्टर से जो रोज बिजली ली जाती है, उसके लिए हर 15 मिनट का शेड्यूल रहता है। 24 घंटे में 96 शेड्यूल करके बिजली ली जाती है। एक दिन पहले शेड्यूल तय होता है कि आने वाले दिन में कितनी बिजली की जरूरत होगी। इसके हिसाब से ही बिजली ली जाती है। आमतौर पर तय शेड्यूल में ज्यादा फर्क नहीं होता है और जितनी बिजली की जरूरत रहती है उतनी बिजली मिलती है और उसकी खपत हो जाती है।
पेशेवर टीम से यह होगा फायदा
जब तय शेड्यूल से बिजली मिलती है और खपत कम होती है, ऐसे में पावर कंपनी के सामने पहला विकल्प यह रहता है कि वह अपना उत्पादन कम कर दें और ऐसा ही ज्यादातर होता है। लेकिन जब अचानक मौसम के कारण खपत बहुत ज्यादा कम हो जाती है, ऐसी स्थिति में बड़ी परेशानी होती है। तब या तो जिनसे बिजली ली जाती है, उनको बिजली सरेंडर कर देते हैं। ऐसा करने से फिक्स चार्ज देने पड़ते हैं। या ऐसा न करके बिजली बेच देते हैं। लेकिन ऐन वक्त पर बिजली लेने वाले मिल जाए यह संभव नहीं होता है। ऐसे में बिजली सरेंडर कर दी जाती है। इससे नुकसान होता है। इस नुकसान से बचने के लिए और खपत का पूर्वानुमान सही लगाने के लिए विशेषज्ञों की पेशेवर टीम बनाने की तैयारी चल रही है।



