माता रानी बम्लेश्वरी की नगरी से ही मिलती है सत्ता का चाबी

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ में अब तक चार बार सरकार बनी है ताे उसमें एक खास बात यह देखने काे मिली है कि डोंगरगढ़ विधानसभा में माता रानी बम्लेश्वरी की नगरी से जिस पार्टी का प्रत्याशी जीतता है, सरकार उसकी ही बनती है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी काे जीत मिली ताे उसकी सरकार बन गई, इसके पहले तीन बार भाजपा के प्रत्याशी काे जीत मिली ताे तीनाें बार उसकी सरकार बनी। अब देखने वाली बात यह हाेगी कि इस बार के चुनाव में यह इतिहास कायम रहता है या फिर इतिहास बदल जाता है।
इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी पूरी तरह से बिसात तो नहीं बिछी है, लेकिन सत्ताधारी कांग्रेस के साथ ही विपक्षी भाजपा अभी से तैयारी में लग गई है। अलग-अलग विधानसभाओं की अपनी अलग-अलग कहानी है और कई चुनावी किस्से भी हैं।
मां बम्लेश्वरी दरबार के कारण प्रदेश के पर्यटन स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला डोंगरगढ़ राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दो लाख मतदाताओं वाली इस विधानसभा सीट से भले ही एक विधायक मिलता है, लेकिन इस सीट पर जीत हासिल करने वाली पार्टी को प्रदेश में सत्ता की चाबी मिल जाती है। बीते चार चुनाव परिणामों से तो यही सामने आया है। दो दशक पहले मध्यप्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ में अब तक चार विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें तीन भाजपा और एक कांग्रेस ने जीता है, लेकिन इन चुनाव में एक रोचक कहानी यह भी रही है कि जिस राजनीतिक दल ने राजनांदगांव जिले की डोंगरगढ़ विधानसभा में जीत हासिल की, प्रदेश में भी उसे ही जीत मिली है। चाहे बात 2003 के चुनाव की हो या फिर 2008, 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव की। ऐसे में इस बार भी दोनों ही दल इस सीट पर अपना कब्जा जमाने के लिए पुरजोर प्रयास करने वाले हैं। प्रदेश में अगले पांच सालों के लिए सत्ता किसके पास रहेगी, इसका चुनाव साल के अंत से पहले हो जाएगा। सरकार बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। बैठकों के दौर से लेकर फील्ड पर मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पसीना बहाया जा रहा है।
भाजपा की तीन बार बनी सरकार
डोंगरगढ़ विधानसभा सीट पर प्रदेश गठन के बाद 2003 के पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा के विनोद खांडेकर ने जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेसी उम्मीदवार धनेश पटिला को करीब पंद्रह हजार मतों से पराजित किया था। इस साल प्रदेश में पहली भाजपा सरकार बनी थी। इसके बाद 2008 में भाजपा के रामजी भारती ने कांग्रेस के धनेश पटिला को लगभग साढ़े 7 हजार मतों से हराया। इसके बाद 2013 में सरोजनी बंजारे भाजपा से उम्मीदवार बनाई गईं और कांग्रेस से प्रत्याशी थानेश्वर पटिला को पांच हजार मतों से पराजित किया। इस बार भी भाजपा की सरकार प्रदेश में बनी थी। इसके बाद 2018 में लंबे इंतजार के बाद इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली और भुवनेश्वर बघेल ने सरोजनी बंजारे को 35 हजार मतों से चुनाव हराया। इस चुनाव में ही कांग्रेस पहली बार प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई।



