
उन्होंने कहा कि ट्रायल अनिवार्य रूप से अदालतों द्वारा की जाने वाली एक प्रक्रिया है। डिजिटल मीडिया द्वारा किया जाने वाला ट्रायल न्याय प्रक्रिया में एक अनुचित हस्तक्षेप है। ऐसा करने में मीडिया कई बार लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन करती है।
जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि आधे-अधूरे सत्य को सामने रखने वाले और न्यायिक प्रक्रिया पर बारीक नजर बनाए रखने वाले लोगों का एक वर्ग कानून के शासन के माध्यम से न्याय देने की प्रक्रिया के लिए एक वास्तविक चुनौती बन गया है। आजकल सोशल और डिजिटल मीडिया पर जजों के निर्णय पर रचनात्मक आलोचनात्मक मूल्यांकन के बजाय उनके खिलाफ व्यक्तिगत राय व्यक्त की जा रही है।



