मुनाफाखोरी से रेत की कीमत डबल
रायपुर(realtimes) प्रदेश के रेत माफिया बारिश का फायदा उठाकर रेत में जमकर मुनाफाखोरी कर रहे हैं। रेत की कीमत एक माह में ही डबल हाे गई है। मानसून के कारण रेत के सभी घाट जून से ही बंद कर दिए गए हैं। इसके बाद भी जहां घाटों में रात को अवैध उत्खनन हो रहा है, वहीं बारिश से पहले डंप करके रखी गई हजारों ट्रक रेत में जमकर मुनाफाखोरी हो रही है। जहां रायल्टी इस समय 650 रुपए के स्थान पर तीन हजार वसूली जा रही है, वहीं लोडिंग भी दस रुपए फीट कर दी गई है। घाट से शहर तक रेत 20 रुपए फीट में पहुंच रही है। चिल्हर कारोबार करने वाले इसकी मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। कोई 24 रुपए ले रहा है तो कोई 26 रुपए तक वसूल रहा है।
मानसून से पहले रेत घाटों से रेत निकालकर घाटों के आस-पास थोक में डंप कर दी गई है। जिनके पास इसकी मंजूरी है, उन लोगों के अलावा भी थोक में अवैध रेत डंप की गई है। जिनके पास जितनी ट्रक की मंजूरी है, उससे कई गुना ज्यादा भी रेत डंप करके रखी गई है। इन डंप सेंटरों ने भारी कीमत में रेत बेची जा रही है। जानकारों का कहना है, रेत की रायल्टी सामान्य दिनों में 650 रुपए के स्थान पर डेढ़ हजार ली जाती है, इस समय उसको तीन हजार रुपए कर दिया गया है। इसी के साथ लोडिंग की कीमत भी डबल से ज्यादा ली जा रही है। इस समय लोडिंग के दस रुपए फीट वसूले जा रहे हैं। यही वजह है कि जो रेत सामान्य दिनों में राजधानी रायपुर तक 10 से 12 में फीट के हिसाब से पहुंचती थी, वह इस समय 20 रुपए फीट में पहुंच रही है।
घाटों में अवैध उत्खनन जारी
घाटों को सरकार ने अक्टूबर तक के लिए मानसून के कारण बंद कर दिया है, लेकिन इसके बाद भी घाटों में रात को अवैध उत्खनन किया जा रहा है। जानकारों का साफ कहना है, ऐसा कोई घाट नहीं है जहां पर रात को उत्खनन न हो रहा हो। एक तो अधिकारी जांच करने जाते नहीं हैं, अगर कोई अधिकारी चले भी जाता है तो उससे पहले उत्खनन करने वालों तक जानकारी पहुंच जाती है। सारा काम अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है।
चिल्हर में लूट
चिल्हर में सबसे ज्यादा लूट मची हुई है। इसका कोई रेट नहीं है जिसकी जितनी मर्जी उस कीमत पर रेत बेच रहा है। ज्यादा कीमत को लेकर कारोबारी कहते हैं दूरी के हिसाब से भाड़ा लगता है, इसलिए कीमत बढ़ जाती है। अगर कारोबारी की दुकान के आस-पास में जरूरत रहती है तो कीमत 22 रुपए फीट भी ले लेते हैं, नहीं तो 24 से 26 रुपए फीट तक कीमत वसूल रहे हैं। चिल्हर में फीट में भी डंडी मारने का काम होता है। कहने को 100 फीट रेत ट्रैक्टर की ट्राली में भेजी जाती है, लेकिन यह 80 फीट से ज्यादा नहीं रहती है। इसी तरह से 50 फीट के स्थान पर 35 फीट रेत ही मिल पाती है। ऐसे में रेत लेने वालों की कीमत 30 रुपए तक लग जाती है।



