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मानवाधिकार के मुद्दे पर चीन को बदनाम करने वाले कुछेक देशों को खारिज किया चीन ने

31 अक्टूबर को अमेरिका, कनाडा समेत कुछेक देशों ने 77वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में चीन पर आरोप लगाते हुए हमला किया । संयुक्त राष्ट्र स्थित चीन के स्थायी प्रतिनिधिमंडल के कार्यवाहक दूत ताइ पिंग ने सख्ती से इसका खंडन किया।

चीनी पक्ष ने कहा कि कई देशों ने बार-बार कहा है कि वे मानवाधिकार मुद्दे के राजनीतिकरण, दोहरे मानकों और मानवाधिकार के बहाने से चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का स्पष्ट रूप से विरोध करते हैं। उन्होंने चीन के मानवाधिकार विकास की उपलब्धियों पर सकारात्मक टिप्पणी की है। भले ही अमेरिका और कुछेक पश्चिमी देश इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करें, वे सफल नहीं होंगे और इससे वे खुद को शर्मसार करेंगे। ताइ पिंग ने कहा कि अमेरिका और पश्चिमी देश शिनच्यांग से संबंधित मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, जिसका लक्ष्य मानवाधिकारों के बहाने से चीन की स्थिरता को कमजोर करना, चीन के विकास में बाधा डालना, और अपने स्वयं के आधिपत्य की रक्षा करना है। लोग इसे स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। उन्हें शिनच्यांग में मानवाधिकार की परवाह नहीं है, बल्कि शिनच्यांग का इस्तेमाल कर चीन को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं और अपने स्वयं का आधिपत्य बनाए रखते हैं। उनका लक्ष्य आज चीन है, और कल वे अन्य विकासशील देशों पर निशाना लगाएंगे।

चीनी पक्ष ने कहा कि अमेरिका और पश्चिमी देश मानवाधिकारों के मामले पर दोहरे मानकों का पालन करते हैं, दर्जनों सदस्य देशों पर आरोप लगाते हुए अपने और अपने दोस्तों के मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे पर गूंगा-बहरा होने का नाटक करते हैं। चीनी पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि चीन विभिन्न पक्षों के साथ वास्तविक बहुपक्षवाद को बनाए रखने, संयुक्त राष्ट्र पर आधारित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की रक्षा करने, अधिक न्यायसंगत और उचित दिशा में वैश्विक शासन के विकास को बढ़ाने, और मानव साझे भाग्य समुदाय के निर्माण को बढ़ावा देने को तैयार है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

 

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