मुंबई के 248 करोड़ के फ्लाईओवर की सड़क धंसी?

मुंबई के गोरेगांव में 248 करोड़ रुपये की लागत से बने मृणालताई गोरे फ्लाईओवर विस्तार की सड़क को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 6 जून को उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क की सतह पर टायरों के गहरे निशान, असमतल हिस्से और दिखाई देने वाले जोड़ नजर आए। 9 जून की सुबह मौके पर पहुंचने पर सड़क के एक हिस्से में बाइक का स्टैंड भी धीरे-धीरे धंसता दिखाई दिया। फ्लाईओवर का यह 750 मीटर लंबा विस्तार राम मंदिर, एसवी रोड, लिंक रोड और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे कॉरिडोर के बीच संपर्क बेहतर करने के लिए बनाया गया है।
जिस सड़क को सालों लगे, वह कुछ दिनों में सवालों में
मृणालताई गोरे फ्लाईओवर विस्तार का काम 2018 में शुरू हुआ था। इसे दो साल में पूरा किया जाना था। लेकिन परियोजना को पूरा होने में करीब आठ साल लग गए। इस दौरान इसकी लागत भी करीब 170 करोड़ रुपये से बढ़कर 248 करोड़ रुपये हो गई।
6 जून को इसके उद्घाटन के बाद 24 घंटे के भीतर ही सड़क की असमतल सतह, दिखाई देने वाले जोड़ों और पैचवर्क के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने लगे। इसके बाद फ्लाईओवर की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे।
सड़क पर गहरे धंसे टायरों के निशान
मौके पर सड़क की सतह पर टायरों के गहरे निशान दिखाई दिए। ये निशान भारी मशीनों और ट्रकों के आवागमन से जुड़े बताए गए हैं।
फ्लाईओवर के एक हिस्से में एक बाइक खड़ी की गई तो उसका स्टैंड धीरे-धीरे सड़क के अंदर धंसने लगा। इससे सड़क की सतह को लेकर सवाल और गंभीर हो गए।
यह वही परियोजना है जिसका काम कई साल की देरी और बार-बार डेडलाइन बढ़ने के बाद पूरा हुआ। उद्घाटन भी बड़े राजनीतिक आयोजन के बीच किया गया था।
विपक्ष ने बीएमसी पर साधा निशाना
फ्लाईओवर की स्थिति सामने आने के बाद विपक्ष ने बीएमसी पर निशाना साधा। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने एक्स पर पोस्ट कर काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
उन्होंने लिखा कि फ्लाईओवर की जमीन से ली गई क्लोज-अप तस्वीरों के बजाय हवाई तस्वीरें पोस्ट की गईं। उन्होंने कहा कि इतनी ऊंचाई से भी घटिया काम और असमतल सतह दिखाई दे रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता और टिप्पणीकार जोरू भटेना ने भी परियोजना को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आठ साल बाद परियोजना पूरी होने का जश्न मनाने के बजाय इसकी गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
एनसीपी-एसपी प्रवक्ता अनीश गवाने ने भी इस मुद्दे पर हमला बोला। उन्होंने फ्लाईओवर के नाम और मृणालताई गोरे की विरासत का जिक्र करते हुए परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।
मृणालताई गोरे के नाम से क्यों जुड़ा है मामला
फ्लाईओवर का नाम समाजवादी नेता मृणालताई गोरे के नाम पर रखा गया है। उन्हें ‘पानीवाली बाई’ के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने उपनगरीय मुंबई में बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए काम किया था। गोरेगांव में पानी की पहुंच को लेकर उनकी लड़ाई भी उनके सार्वजनिक जीवन का अहम हिस्सा रही।
पूर्व कॉर्पोरेटर और विधायक के तौर पर मृणालताई गोरे ने मजदूरों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और शहरी गरीबों से जुड़े मुद्दे उठाए।
वरिष्ठ पत्रकार धवल कुलकर्णी ने भी एक्स पर मृणालताई गोरे के साथ जॉर्ज फर्नांडिस और शोभनाथ सिंह जैसे समाजवादी पार्षदों के नेतृत्व में हुए आंदोलनों का जिक्र किया। उनके मुताबिक इन आंदोलनों के दबाव के बाद बीएमसी ने दशकों पहले अंग्रेजी की जगह मराठी को अपनी आधिकारिक भाषा बनाया था।
बीएमसी ने क्या सफाई दी
विवाद बढ़ने के बाद बीएमसी ने फ्लाईओवर का बचाव किया। उसके स्पष्टीकरण में कहा गया कि दिखाई देने वाले जोड़ तकनीकी निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
पुल विभाग के मुताबिक इस्तेमाल किया गया मैस्टिक डामर शुरुआत में खुरदरा और पैची दिखाई दे सकता है। खासकर उन हिस्सों में जहां काम हाथ से किया गया हो। विभाग ने कहा कि वाहनों के चलने के साथ सड़क की सतह समतल हो जाएगी।
हालांकि, बीएमसी की यह सफाई आलोचकों को संतुष्ट नहीं कर पाई। इसी बीच ऐसी खबरें भी सामने आईं कि बीएमसी के विजिलेंस विभाग ने कई साल पहले फ्लाईओवर से जुड़े ढांचागत मुद्दों को लेकर चेतावनी दी थी।
फिलहाल 248 करोड़ रुपये की इस परियोजना की सड़क की स्थिति और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल बने हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस फ्लाईओवर को पूरा होने में करीब आठ साल लगे, उसकी सतह उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद विवादों में क्यों आ गई।



