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खास खबर: कापी, किताबों की कीमत बढ़ने से बस्ते का बोझ बढ़ा 60 फीसदी

रायपुर(realtimes) शिक्षा वैसे भी बहुत महंगी हाे गई है। आम आदमी के लिए अपने बच्चाें काे पढ़ाना मुश्किल हाे रहा है। निजी स्कूलाें की मनमर्जी पर काेई राेक नहीं लगा पा रहा है। जिनकाे जितनी मर्जी उतनी फीस बढ़ा देता है। इधर महंगाई की मार से परेशान आम लोगों पर अब एक और महंगाई की मार पड़ी है। जून से स्कूल खुल गए हैं और कापी के साथ किताबों की कीमत में इजाफा हो गया है। ऐसे में बस्ते का बोझ करीब 60 फीसदी तक बढ़ गया है।

महंगाई की आग से हर सेक्टर झुलस रहा है। चौतरफा महंगाई के कारण आम आदमी का पूरा बजट तहस-नहस हो गया है। हर सेक्टर में महंगाई बढ़ते जा रही है। पहले से ही शिक्षा बहुत महंगी है। निजी स्कूलों की फीस जहां पहले से बेलगाम है, वहीं अब कापी और किताबों पर भी महंगी की बड़ी मार पड़ी है। कापियों में जहां पन्ने कम हो गए हैं, वहीं दाम भी बढ़ गए हैं। कापियों के दाम 50 फीसदी और किताबों के 25 फीसदी तक बढ़े हैं। ए फोर साइज के पेपर की कीमत में भी 25 फीसदी तक इजाफा हो गया है।

किसमें कितना इजाफा

स्टेशनरी कारोबारी बताते हैं, कापियों के साथ स्कूलों विद्यार्थियों के काम आने वाले बाकी सामान भी महंगे हो गए हैं। कागज में करीब 40 फीसदी का इजाफा होने का पूरा असर कापियों पर पड़ा है। जो लोकल 64 पेज की कापी पहले दस रुपए में मिलती थी, वह अब जहां 48 पेज की हो गई है, वहीं इसकी कीमत 15 रुपए हो गई है। इसी तरह से 28 पेज की पांच रुपए वाली कापी के पेज जहां 20 हो गए हैं, वहीं कीमत दस रुपए हो गई है। यानी इनकी कीमत 50 फीसदी बढ़ी है। इसी तरह से 20 रुपए वाली रफ कापी अब 25 से 30 रुपए की हो गई है। बड़ी कापियों की बात करें तो 120 पेज वाली कापी 15 रुपए के स्थान पर 25 रुपए, 164 पेज वाली कापी 30 के स्थान पर 45 रुपए हो गई है। ब्रांडेड कंपनियों की कापियां और ज्यादा महंगी हो गई हैं। 120 पेज वाली कापी जहां 50 रुपए की है, वहीं 164 पेज वाली कापी की कीमत 80 रुपए है।

पेपर की कीमत भी बढ़ी

प्रेम स्टेशनरी के लक्ष्मण नचरानी ने बताया जो ए फोर साइज के पेपर के 10 बंडल 1400 रुपए में मिलते थे वो 1700 रुपए हो गए हैं। सादा कागज भी 70 रुपए किलो से बढ़कर 90 रुपए किलो हो गया है। डायरियों के साथ बाकी स्टेशनरी के दाम भी बढ़े हैं। इधर पुस्तक कारोबारी बताते हैं, पुस्तकों की कीमत में 25 फीसदी तक इजाफा हुआ है। चार सौ रुपए वाली पुस्तक पांच सौ और आठ सौ रुपए वाली पुस्तक एक हजार हो गई हैं। अलग-अलग प्रकाशकों ने अपनी पुस्तकों के अलग-अलग दाम बढ़ाए हैं। किसी में 10 तो किसी में 20 और किसी में 25 फीसदी तक दाम बढ़े हैं।

बस्ते का बढ़ा बोझ

कापी और किताबों की कीमत बढ़ने का बड़ा असर बस्ते के बोझ पर पड़ा है। छोटी क्लास के कापी और किताबे जो पहले दो हजार से 22 सौ में आ जाती थी, वह तीन से साढ़े तीन हजार तक हो गई है। इसी तरह से बड़ी क्लास की कापी और किताबें अब चार से पांच हजार से बढ़कर छह से सात हजार तक हो गई है। कारोबारी बताते हैं एनसीआरटी की किताबें तो बहुत सस्ती है, पर रिफरेंस वाली किताबें महंगी हैं।

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