बिजली बिल हॉफ की बचत से बढ़ी औसत खपत, उपभोक्ताओं काे नहीं लग रही ज्यादा चपत

रायपुर(realtimes) प्रदेश सरकार ने घरेलु उपभोक्ताओं की बिजली बिल हॉफ करने की योजना ने आम आदमी काे राहत देने का काम किया है। इस याेजना से होने वाली बचत के कारण ही बिजली की औसत खपत भी बढ़ गई है। मौसम अब ऐसा हो गया है कि लोगों को साल में कम से कम 9 माह तक एसी और कूलर चलाने पड़ रहे हैं। यही नहीं लोग गर्मी के समय में अब पहले से ज्यादा घंटों तक एसी और कूलर भी चलाते हैं जिसके कारण लगातार साल दर साल लोगों की औसत खपत में इजाफा हो रहा है। औसत खपत बढ़ने के कारण ही सुरक्षा निधि में भी इजाफा हुआ है। अब तो दो माह के बिल के बराबर सुरक्षा निधि लिए जाने के कारण लोगों को अंतर की राशि की भुगतान करना पड़ रहा है।
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने के बाद मार्च 2019 से बिजली बिल हॉफ योजना प्रारंभ हुई है। इसमें चार सौ यूनिट तक खपत करने वालों का बिल आधा कर दिया जाता है। इस योजना के प्रारंभ होने के बाद से ही लोगों की खपत में इजाफा होने का क्रम प्रारंभ हुआ है। जैसे-जैसे लोगों के समझ आया कि उनको हर माह साढ़े आठ सौ की बचत हो रही है तो उसके हिसाब से लोगों ने अपनी खपत में इजाफा भी कर लिया। अब तो टैरिफ और वीसीए में इजाफा होने के कारण छूट की सीमा एक हजार से पार हो गई है।
एसी-कूलर चल रहे ज्यादा
अब तो मौसम ऐसा हो गया है कि लोगों को साल में 9 माह तक एसी और कूलर चलाने पड़ रहे हैं। पहले महज गर्मी के समय ही इनका उपयोग होता था, लेकिन अब गर्मी और बारिश के बाद नवंबर में भी एसी और कूलर चल रहे हैं क्योंकि जितनी ठंड अक्टूबर और नवंबर में पड़नी चाहिए, उतनी नहीं पड़ रही है। जहां तक जून के बाद बारिश के मौसम का सवाल है तो बारिश में भी उमस के कारण ज्यादातर समय एसी और कूलर चलते हैं। कूल मिलाकर दिसंबर और जनवरी ही दो माह ऐसे बच जाते हैं जिसमें एसी और कूलर चलाने की जरूरत नहीं पड़ती है। बीच के दस माह में ज्यादा से ज्यादा एक माह और रहता है जिसमें एसी और कूलर नहीं चलते हैं।
अब दो माह की सुरक्षा निधि
अब तक पॉवर कंपनी उपभोक्ताओं से उनकी औसत खपत का डेढ़ माह का बिजली बिल सुरक्षा निधि के रूप में जमा रखती थी, लेकिन अब इसको दो माह का कर दिया गया है। अगर किसी की खपत चार सौ यूनिट है तो उसका एक माह का बिल 24 सौ रुपए के आस-पास रहता है। ऐसे में पहले सुरक्षा निधि में 36 सौ रुपए जरूरी रहते थे, लेकिन अब ये 48 सौ रुपए हो गए हैं। ऐसे में जिनके पहले 36 सौ रुपए है उनको 12 सौ और देने पड़ रहे हैं। इसी के साथ जिनकी औसत खपत में और इजाफा हो गया है, उसको और ज्यादा सुरक्षा निधि देनी पड़ रही है।



