प्रीपेड मीटर देंगे हजार करोड़ से ज्यादा की सुरक्षा निधि का भी बड़ा झटका

रायपुर(realtimes) अब तक तो उपभोक्ताओं काे ही सुरक्षा निधि का बड़ा झटका लगता रहा है, लेकिन पहली बार छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी काे भी इसका तगड़ा झटका लगने वाला है। प्रदेश के 60 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से 54 लाख के पुराने मीटर बदलकर नए साल में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगेंगे। इनको लगाने पर ही छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी को चार हजार करोड़ का खर्च करना पड़ रहा है। इस एक बड़े झटके के साथ कंपनी को एक और बड़ा झटका सुरक्षा निधि वापस करने का लगेगा। हजार करोड़ से ज्यादा की सुरक्षा निधि भी वापस करनी पड़ेगी, क्योंकि प्रीपेड में सुरक्षा निधि का कोई प्रावधान नहीं है। इसमें पहले रिचार्ज कराने पर ही बिजली मिलेगी। उद्योगों के मीटर नहीं बदलेंगे इसलिए उनकी सुरक्षा निधि वापस न करने से कंपनी को कुछ राहत रहेगी, नहीं तो कंपनी को दो हजार करोड़ से ज्यादा की सुरक्षा निधि वापस करने का करंट लग जाता।केंद्र सरकार ने पूरे देश के सभी राज्यों में पोस्टपेड मीटरों का प्रावधान ही समाप्त करके उसके स्थान पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की योजना लागू की है। देश के आधा दर्जन राज्यों में ये मीटर लगने भी प्रारंभ हो गए हैं। अब अपने राज्य में भी इनको लगाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए 22 दिसंबर को टेंडर भी खुल जाएगा और इस माह के अंत में या फिर नए साल के पहले माह में टेंडर को फाइनल करके मीटर लगाने का काम प्रारंभ किया जाएगा।
सुरक्षा निधि होगी वापस
प्रदेश में जो 60 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, उसमें से करीब छह लाख कृषि पंपों के उपभोक्ता हैं। इनमें स्मार्ट मीटर नहीं लगेंगे। इसी के साथ 20 लाख के करीब बीपीएल के उपभोक्ता हैं, इनसे सुरक्षा निधि नहीं ली जाती है। करीब 35 लाख उपभोक्ता जिनकी सुरक्षा निधि जमा है उनको वापस करनी पड़ेगी। पॉवर कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक हर माह करीब 12 सौ करोड़ के बिल बनते हैं। इसके मुताबिक दो माह के बिल के बराबर सुरक्षा निधि जमा रहती है, वह करीब 24 सौ करोड़ है। लेकिन उद्योगों के मीटर न बदलने के कारण उनकी सुरक्षा निधि वापस नहीं होगी। यह निधि बहुत ज्यादा होती है। यह निधि 12 सौ करोड़ से ज्यादा है। ऐसे में कंपनी को करीब एक हजार करोड़ की सुरक्षा निधि वापस करनी होगी।



