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प्रियदर्शिनी बैंक घोटाला, अदालत ने दिया जांच का आदेश

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार के दौरान करीब 14 साल पहले हुआ इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाला को लेकर अदालत ने दिया जांच का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि, जांच के दौरान नार्को टेस्ट में प्रमुख अभियुक्तों में से एक उमेश सिन्हा ने बताया‌ था कि उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके मंत्रियों अमर अग्रवाल, बृजमोहन अग्रवाल व रामविचार नेताम सहित कई भाजपा नेताओं को करोड़ों रुपए दिए थे। इसके अलावा बैंक संचालकों सहित कई अन्य लोगों को भी पैसे दिए गए।
इसे लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक ट्वीट भी किया है।

कुछ दिनों पहले इंदिरा बैंक संघर्ष समिति ने घोटाले की जांच में तेजी लाने की मांग को लेकर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को ज्ञापन सौंपा। समिति ने मांग की है कि बैंक के तत्कालीन मैनेजर उमेश सिन्हा के नार्को टेस्ट की सीडी को न्यायालय में पेश किया जाए।

इंदिरा बैंक संघर्ष समिति के अध्यक्ष कन्हैया अग्रवाल ने बताया कि बैंक घोटाले के आरोपितों तक पहुंचने के उद्देश्य से प्रमुख आरोपित बैंक मैनेजर का नार्को टेस्ट भी किया गया था। टेस्ट सार्वजनिक होने के बावजूद अभी तक न्यायालय में पेश नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि अभी भी बैंक के बहुत से खातेदार ऐसे हैं, जिनके पैसे पूरी तरह से डूब गए।

यह था मामला

साल 2006 में आर्थिक अनियमितता पाए जाने पर बैंक बंद हुआ था। इंदिरा बैंक में 28 करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद सभी खातेदारों में हड़कंप मच गया था। बैंक में करीब 22 हजार खातेदार थे। घोटाला उजागर होने के बाद बैंक ने अपने आप को डिफाल्टर घोषित कर दिया था और इंश्योरेंस कंपनियों की मदद से खातेदारों को राशि भी लौटाई थी। लेकिन यह राशि काफी कम थी। अभी भी उपभोक्ताओं के करीब 14 करोड़ रुपये लौटाना बाकी है।

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