टीम साव में कई नए चेहरे दिखाएंगे ताव - realtimes
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टीम साव में कई नए चेहरे दिखाएंगे ताव

रायपुर(realtimes) भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष अरूण साव की नई टीम तैयार करने की कवायद चल रही है। इस नई टीम में कई नए चेहरे ताव दिखाते नजर आने वाले हैं। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव के पहले प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय के स्थान पर बिलासपुर के सांसद अरूण साव को नया अध्यक्ष बनाया है। जो पुरानी कार्यकारिणी है, उसको पूरा तो नहीं बदला जाएगा, लेकिन बहुत कुछ फेरबदल की संभावना है। इसी के साथ उपाध्यक्ष और प्रदेश मंत्री के पद भी बढ़ेंगे। कई जिला अध्यक्ष और मोर्चा, प्रकोष्ठ के भी अध्यक्ष और संयोजकों में बदलाव होगा। जो भी निष्क्रिय पदाधिकारी हैं, उनको बाहर का रास्ता दिखाने से परहेज नहीं किया जाएगा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के रायपुर दौरे के बाद नई कार्यकारिणी का ऐलान होने की संभावना जताई जा रही है। नए प्रदेशाध्यक्ष अरूण साव कार्यकारिणी में बदलाव की बात तो कर रहे हैं, लेकिन कार्यकारिणी का ऐलान कब होगा, इसकी कोई तिथि नहीं बता पा रहे हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय संगठन ने मिशन 2023 को लेकर प्रदेश संगठन में बदलाव की रणनीति बनाई है। प्रदेशाध्यक्ष के बदलाव के साथ इसकी शुरुआत हो चुकी है। भाजपा के जानकारों का कहना है, अब लगातार बदलाव का दौर चलेगा। नए प्रदेशाध्यक्ष प्रदेश के दिग्गज नेताओं से रायशुमारी करके अपनी नई टीम बनाएंगे। इसके लिए रायशुमारी का दौर चल भी रहा है। रायशुमारी के बाद जो सूची बनेगी, उसको सबसे पहले राष्ट्रीय सहसंगठन महामंत्री और प्रदेश के संगठन प्रभारी शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डी पुरंदेश्वरी, सहप्रभारी नितिन नवीन और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल को दिखाकर उनकी सहमति ली जाएगी। इसके बाद इसको राष्ट्रीय नेतृत्व के पास भेजा जाएगा। वहां पर बोर्ड बैठक में इस सूची पर मुहर लगने के बाद ही ऐलान होगा।

बदलेंगे दो महामंत्री

प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव दो महामंत्रियों को लेकर होने वाला है। एक महामंंत्री नारायण सिंह चंदेल तो नेता प्रतिपक्ष बन गए हैं। ऐसे में उनका स्थान खाली हाे गया है। एक और महामंत्री भूपेंद्र सवन्नी बिलासपुर के हैं। प्रदेशाध्यक्ष भी बिलासपुर के होने के कारण अब उनको भी बदले जाने की बात हो रही है।

बढ़ सकते हैं उपाध्यक्ष, मंत्री

संगठन में इस समय चार उपाध्यक्ष हैं, इनकी संख्या में इजाफा किया जा सकता है। राष्ट्रीय संगठन में भी ज्यादा उपाध्यक्ष हैं। यहां पर दो से चार नए उपाध्यक्ष रखे जा सकते हैं। इसी तरह से मंत्रियों की संख्या में भी इजाफा किया जा सकता है। कुछ समय पहले ही छह और प्रवक्ता बनाकर प्रवक्ताओं की संख्या को 12 किया गया है। पुराने उपाध्यक्ष और मंत्रियों के साथ अन्य पदाधिकारियों में भी बदलाव की संभावना है।

मोर्चा, प्रकोष्ठ, जिलाध्यक्षाें में भी बदलाव

मोर्चा और प्रकोष्ठ के साथ कई जिलों के अध्यक्ष भी बदले जाने की बात हो रही है। सबसे अहम तीन मोर्चों भाजयुमो, किसान और महिला मोर्चा में बदलाव की बात की जा रही है। हालांकि भाजयुमो के रायपुर में हल्ला बोल कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद अब भाजयुमो अध्यक्ष को बदले जाने पर कुछ संशय है। लेकिन कोई भी फैसला राष्ट्रीय संगठन को करना है। अगर राष्ट्रीय संगठन जातीय समीकरण में अध्यक्ष को बदल दें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। महिला और किसान मोर्चा के अध्यक्ष अध्यक्ष बनने के बाद ज्यादा कुछ नहीं कर सके हैं, ऐसे में उनके बदले जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। इसी के साथ जिन जिलों के अध्यक्षों से कार्यकर्ता खुश नहीं होंगे, उनकी भी विदाई होगी।

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