छत्तीसगढ़ के हज यात्रियों से वसूली गई अतिरिक्त राशि होगी वापस, हाई कोर्ट का फैसला

मदनी सोशल वेलफेयर ग्रुप ने लगाईं थी याचिका
रायपुर(realtimes) हज कमेटी ऑफ इंडिया ने इस वर्ष 2023 की हज यात्रा के लिए इच्छुक हज यात्रियों से आवेदन पत्र आमंत्रित किया था । छत्तीसगढ़ के लगभग 692 मुस्लिम लोगों ने हज यात्रा पर जाने के लिए ऑनलाईन आवेदन पत्र दिये थे। हज कमेटी ऑफ इंडिया ने भारत के विभिन्न एम्बारकेशन पाईट से हज यात्रा पर जाने के लिए अलग-अलग कुल राशि तय की है और इस बाबत उसने अपना सर्कुलर 6 मई को जारी किया है। उक्त सर्कुलर के अनुसार छत्तीसगढ़ के हज यात्रियों के लिए एम्बारकेशन पाईंट नागपुर तय किया गया है एवं उसके लिए कुल राशि 3,67,044 रुपये तय की गई है एवं एम्बारकेशन पाईट मुम्बई के लिए कुल राशि 3,04,843 राशि तय की गई है, जिसमे 62,201 का अंतर है। चुकि पूर्व में छत्तीसगढ़ के हज यात्री मुंबई से हज यात्रा के लिए निकलते थे एवं उनसे मुम्बई एम्बारकेशन पाईंट का तय किराया लिया जाता था परंतु अब एम्बारकेशन पाईट नागपुर तय कर उनसे अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है जिससे क्षुब्ध हो मदनी सोशल वेलफेयर ग्रुप छत्तीसगढ़ के नौमान अकरम हमीद, मोहम्मद आरिफ, हाजी हमीद, सईद सादिक अली, जावेद नाना एवं जमील अहमद ने छत्तीसगढ़ के हाजियों की ओर से अपने अधिवक्ता मिर्जा हफीज बैग के माध्यम से एक रिट याचिका (डब्लू.पी.सी.) क्रमांक 2532 / 2023 माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय वैकेशन बेंच के समक्ष प्रस्तुत किये जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने 8 जून को गंभीरतापूर्वक सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ के हज यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए उनके निवेदन पर उनका एम्बारकेशन पांईट नागपुर से बदलकर मुम्बई यथाशीघ्र तय करने एवं वसूली गई अतिरिक्त राशि को वापस करने का आदेश हज कमेटी ऑफ इंडिया को दिया है। उच्च न्यायालय ने हज कमेटी ऑफ इंडिया को छत्तीसगढ़ के हज यात्रियों के निवेदन पर उनका एम्बाकेशन पांईट शीघ्र बदलने एवं उनसे वसूली गई अतिरिक्त राशि उन्हें वापस करने का आदेश 8 मई को दिया है। अब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय माननीय वेकेशन बेंच के जस्टिस माननीय संजय के. अग्रवाल ने अपना आदेश पारित कर छत्तीसगढ़ हज यात्रियों को उपरोक्त राहत प्रदान की है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उक्त आदेश से छत्तीसगढ़ के गरीब हज यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब देश के अन्य राज्यों के हज यात्री भी उपरोक्त राहत प्राप्त करने के लिए अपने-अपने उच्च न्यायालय की शरण ले रहे है।



