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छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों का पावर कंपनी काे 2000 करोड़ का करंट

रायपुर. छत्तीसगढ़ में राज्य पावर कंपनी काे सरकारी विभाग ही हर साल दाे हजार का करंट लगाने का काम कर रहे हैं। विभाग हर साल दो हजार करोड़ से ज्यादा की बिजली जलाते हैं, लेकिन जहां तक बिल जमा करने का सवाल है तो ज्यादातर विभाग फूटी कौड़ी नहीं देते हैं। हमेशा से सरकारी विभाग पर करोड़ों का बकाया रहता है। इस समय भी सरकारी विभागों पर 1736 करोड़ का बकाया है। 2022-23 के सत्र में भी दो हजार करोड़ का बिल बकाया था, इसमें से महज 385 करोड़ राज्य सरकार ने दिए हैं, तब जाकर बकाया कुछ कम हुआ है।

प्रदेशभर के सरकारी विभाग राज्य बनने के बाद से ही बेलगाम है। बरसों से विभाग बिजली जलाने के बाद बिल ही जमा नहीं करते हैं। इनमें पंचायत और नगरीय निकाय विभाग पहले नंबर पर है। इन पर हमेशा से ही करोड़ का बकाया रहता है, आम जनता से जुड़े विभाग होने के कारण इनकी बिजली कभी कट नहीं होती है। इसी तरह से स्वास्थ्य विभाग में अस्पतालों का बिजली बिल जमा नहीं होता है। पुलिस थाने भी कभी बिल जमा नहीं करते हैं। ऐसा कोई भी सरकारी विभाग नहीं जिस पर बकाया न हो। कुछ विभाग पैसा जमा करते हैं, पर वाे भी कभी कभार किए जाते हैं।
सरकार से लगानी पड़ती है गुहार
प्रदेश में आम उपभोक्ता पर थोड़ा सा बकाया होने पर उनकी बिजली कट करने पॉवर कंपनी के कर्मचारी पहुंच जाते हैं। वहीं सरकारी विभागों की बिजली कभी कट नहीं की जाती है। यही वजह है कि सरकारी विभाग हमेशा से बेलगाम रहे हैं। ये बिल ही जमा नहीं करते। अंत में पावर कंपनी को प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर बजट में विभागीय बजट से ही बिलों का भुगतान लेना पड़ता है। इस समय सरकारी विभागों में सबसे बड़ा बकाया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर 550 करोड़ से ज्यादा का है। नगरीय निकाय पर 550 करोड़ से का बकाया था, लेकिन जनवरी में राज्य सरकार से दो सौ करोड़ मिलने पर यह बकाया 300 करोड़ हो गया था, लेकिन अब वापस यह मार्च में 400 करोड़ के पार हो गया है।
जलाई 2121 करोड़ की बिजली
प्रदेश के सरकारी विभागों ने 2022-23 में अप्रैल से लेकर मार्च तक 2121 करोड़ की बिजली जलाई है। इसमें से राज्य सरकार से 385 करोड़ मिले हैं। अब भी विभागों पर 1736 करोड़ का बकाया है। अब इस बकाया के लिए पॉवर कंपनी को राज्य सरकार को मांग पत्र भेजना पड़ेगा। इसके बाद राज्य सरकार विभागों के बजट में से पैसे काटकर पावर कंपनी को देगी। लेकिन यह पैसा भी पूरा नहीं होगा। आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ है कि सरकारी विभागों का बकाया पूरी तरह से समाप्त हो गया हो।
इन पर कम बकाया
जहां एक तरफ सबसे ज्यादा बकाया वाले विभाग हैं, वहीं कुछ ऐेसे विभाग भी हैं, जिन पर बकाया कम है। ऐसे विभागों में सबसे कम बकाया विधि-विधायी विभाग पर 1 करोड़ 52 लाख रुपए है। इसके बाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विभाग पर 1 करोड़ 10 लाख का बकाया है। अन्य विभागों में उच्च शिक्षा पर 1 करोड़ 7 लाख, ग्रामोद्योग पर 75 लाख, सहकारिता विभाग पर 63 लाख के साथ ही कई विभागों पर एक से 25 लाख तक का बकाया है।
ये हैं बड़े बकायेदार
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 550 करोड़ से ज्यादा
नगरीय निकाय एवं विकास विभाग 400 करोड़ से ज्यादा
स्कूल शिक्षा विभाग 70 करोड़
चिकित्सा विभाग 60 करोड़
पुलिस विभाग 30 करोड़
जल संसाधन विभाग 22 करोड़
आवास एवं पर्यावरण 14 करोड़
महिला एवं बाल विकास 15 करोड़
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन 11 करोड़

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