मानसून में पहली बार बिजली की रिकॉर्ड तोड़ 5892 मेगावाट खपत - realtimes
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मानसून में पहली बार बिजली की रिकॉर्ड तोड़ 5892 मेगावाट खपत

रायपुर(realtimes) मानसून में जब झमाझम बारिश का समय हाेता है, ऐसे में अगर बिजली की रिकॉर्डतोड़ खपत हाे जाए ताे सबका हैरान होना लाजिमी है। यही इस बार हुआ है, देश के अपने राज्य छत्तीसगढ़ में भी कपत ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। प्रदेश में मौसम के तेवर लगातार बदलने के कारण बिजली की खपत का ग्राफ ऊपर-नीचे हो रहा है। अगस्त का माह बड़े रिकॉर्ड वाला रहा है। पहले खपत आधी हो गई इसके बाद अब खपत ने गर्मी ने भी ज्यादा खपत का नया रिकॉर्ड बना दिया है। गर्मी में इस बार अप्रैल में खपत 5878 मेगावाट तक गई थी, इस रिकॉर्ड को ब्रेक करके 17 अगस्त को 5892 मेगावाट का नया रिकॉर्ड बना है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहले कभी इतनी खपत नहीं हुई थी। ज्यादा खपत के कारण पावर कंपनी को सेंट्रल सेक्टर से बिजली लेनी पड़ी है। ज्यादा खपत के पीछे का कारण कृषि पंपों के चलने के साथ उमस के कारण एसी और कूलरों का लगातार चलना है।
अगस्त का पहला सप्ताह पावर कंपनी के साथ बिजली के उपभोक्ताओं के लिए भी राहत लेकर आया। इस सप्ताह लगातार बारिश होने के कारण उमस से जहां राहत मिली, वहीं एसी और कूलरों का चलना बंद तो नहीं हुआ है, लेकिन बहुत कम हो गया। इसकी वजह से बिजली की खपत भी बहुत कम हो गई है। उमस के कारण जुलाई में बिजली की खपत लगातार ज्यादा हुई। माह के अंत में खपत 52 सौ मेगावाट के पार हो गई। अगस्त में पहले और दूसरे सप्ताह में राहत के बाद तीसरे सप्ताह में खपत का ग्राफ तेजी से बढ़ा और एक समय 17 अगस्त को खपत ने 5892 मेगावाट का नया रिकॉर्ड बना दिया।
सेंट्रल सेक्टर का सहारा
छत्तीसगढ़ राज्य उत्पादन कंपनी के कोरबा और मड़वा के संयंत्रों को मिलाकर अपना उत्पादन 24 से 25 सौ मेगावाट हो रहा है। खपत लगातार ज्यादा होने के कारण सेंट्रल सेक्टर से तीन हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली लेनी पड़ी है। सेंट्रल सेक्टर से बिजली लेने के लिए एक दिन पहले शेड्यूल करना पड़ता है। ऐसे में मौसम की मार से खपत कम होने पर बची बिजली को लेकर कंपनी को परेशानी होती है। कंपनी को बिजली वापस करने पर भी नुकसान होता है। बिजली को बेचने का भी प्रयास रहता है, लेकिन तत्काल में खरीदार नहीं मिल पाते हैं।
एसी-पंपों का लोड ज्यादा
मानसून ने बाद भी इस समय बारिश न होने के कारण सबसे ज्यादा लोड एसी और कृषि पंपों का हो गया है। कृषि पंपों पर ही रोज सात सौ मेगावाट की खपत हो जाती है। इसी के साथ एसी और कूलर का लोड भी एक से डेढ़ हजार मेगावाट का हाे जाता है। यही वजह है कि मानसून में खपत पहली बार छह हजार मेगावाट के करीब पहुंच गई है।
उपभोक्ताओं की संख्या में भी भारी इजाफा
कुछ साल पहले की तुलना में इस समय प्रदेश में बिजली के उपभोक्ता करीब 63 लाख हो गए हैं। ज्यादा उपभोक्ता होने की वजह से भी लगातार खपत बढ़ी है। इसी के साथ प्रदेश की कांग्रेस सरकार 400 यूनिट तक बिजली बिल हॉफ का जो फायदा दे रही है, उसकी वजह से भी उपभोक्ता अब एसी और कूलर ज्यादा चलाने से परहेज नहीं करते हैं।

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