खास खबर: बदलाव में बह गए भाजपा के दिग्गज नेताओं के मंसूबे

रायपुर(realtimes) प्रदेश भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने प्रदेश संगठन में बदलाव काे देखते हुए लंबे समय से मंसूबे पाल रखे थे। लगातार कई नेता दिल्ली दरबार तक की दाैड़ लगा चुके थे, उनकाे उम्मीद थी कि जब बदलाव हाेगा ताे उनकाे इसका फायदा मिलेगा, लेकिन बदलाव की बयार चली ताे सभी दिग्गज नेताओं के मंसूबे भी बह गए। किसी काे जहां कुछ हासिल नहीं हुआ वहीं अब तक यह तय नहीं हाे सका है कि आने वाले समय में उनकी भूमिका क्या हाेगी।
भाजपा का राष्ट्रीय संगठन मिशन-2023 को लेकर बहुत गंभीर है। भाजपा हर हाल में आने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता में वापस आना चाहती है। इसको लेकर हर संभव कवायद की जा रही है। सबसे पहले इसके लिए पिछले माह ठीक आदिवासी दिवस के दिन ही भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय के स्थान पर बिलासपुर के सांसद अरूण साव को नया प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष 17 अगस्त को बदला गया। धरमलाल कौशिक के स्थान पर नारायण सिंह चंदेल को कमान सौंपी गई। इन दो बड़े बदलावों के बाद 9 सितंबर को यहां पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का दौरा हुआ और रोड शो के साथ ही बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन हुआ तो कार्यकर्ता सम्मेलन के समाप्त होने के बाद अचानक प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी को बदल दिया गया और उनके स्थान पर कमान राजस्थान के ओम माथुर को सौंप दी गई। इसके दो दिन बाद अरूण साव की टीम में भी बड़ा बदलाव किया गया। 60 प्लस वालों को बाहर का रास्ता दिखाने से भी परहेज नहीं किया गया। टीम साव में ज्यादा से ज्यादा नए चेहरों को शामिल किया गया।
क्या हाेगा पूर्व सीएम रमन का
सबसे पहले बात करें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की। उनको लेकर कई तरह की खबरें आती रही हैं। उनको राज्यपाल बनाए जाने की कई बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन यह भी कहा जाता है कि इसके लिए वे मना कर चुके हैं। चुनाव में उनके चेहरे को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पूर्व प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी के साथ ही सहप्रभारी नितिन नवीन भी यह कहते रहे हैं कि हमारा चेहरा विकास होगा, हर कार्यकर्ता होगा। यानी यह तय है कि रमन के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा जाएगा। ऐसे में आने वाले समय में डॉ. रमन की भूमिका क्या होगी, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन लगातार यही चर्चा है कि उनकाे चुनाव के पहले राज्यपाल बनाकर किसी राज्य में भेजा जाएगा। इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
इनके मंसूबे नहीं हुए पूरे
भाजपा में कई ऐसे दिग्गज नेता हैं, जाे प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हाेना चाहते थे। लेकिन इनके मंसबूे पूरे नहीं हुए। ऐसे दिग्गज नेताओं में सरोज पांडेय, रामविचार नेताम, नंदकुमार साय, सांसद संतोष पांडेय, विजय बघेल, वरिष्ठ विधायक बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर, शिवरतन शर्मा, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, ननकीराम कंवर के नाम अहम हैं।
साय पर अब तक फैसला नहीं
प्रदेशाध्यक्ष के पद से हटाए गए विष्णुदेव साय को लेकर उनके हटाए जाने के दिन से ही यह कहा गया कि उनको राष्ट्रीय एसटी आयोग में उपाध्यक्ष बनाया जाएगा, लेकिन एक माह बाद भी उनको लेकर कोई फैसला नहीं हो सका है। इसकाे लेकर आदिवासी समाज में नाराजगी ताे है, पर इसकाे काेई बयां नहीं कर रहा है, क्याेंकि सभी पार्टी के अनुशासन के बंधे हैं।


