क्रूड ऑइल 35 फीसदी सस्ता, फिर भी पेट्रोल महंगा, 57 रुपए की बेस प्राइस पर 41 रुपए टैक्स

रायपुर. केंद्र सरकार कहती है पेट्राेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से तय होती है, लेकिन पिछले एक साल में क्रूड ऑइल की कीमत में 35 फीसदी की कमी आने के बाद भी पेट्रोल की कीमत काे कम नहीं किया जा रहा है। आम आदमी अपने काे ठगा सा महसूस कर रहा है।
देश भर के साथ छत्तीसगढ़ में भी पेट्रोल की 15 माह से सौ रुपए के पार है। इस समय राजधानी रायपुर में कीमत 102.45 है। यही कीमत 15 माह पहले तब थी जब केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम की थी। इसके बाद से कच्चे तेल की कीमत में बहुत गिरावट आने के बाद भी पेट्रोल की कीमत को कम नहीं किया जा रहा है। जो कच्चा तेल पिछले साल 94 डॉलर बैरल था, वह इस समय 83.19 डॉलर पर है, लेकिन कीमत में कोई कमी नहीं की गई है। आम जनता यह मानकर चल रही है कि उसके साथ पेट्रोल में टैक्स के नाम पर भारी लूट हो रही है। पेट्रोल की बेस कीमत 57.35 रुपए है जबकि केंद्र और राज्य सरकार का टैक्स 41.10 रुपए है।
आम आदमी महंगाई से परेशान है। सबसे ज्यादा पेट्रोल की कीमत का असर हो रहा है। कच्चे तेल की कीमत में तो लगातार गिरावट आ रही है, लेकिन केंद्र सरकार पेट्रोल की कीमत को कम करने का काम कर ही नहीं रही है। पिछले साल 21 मई को एक्साइज ड्यूटी में कमी करने के बाद पेट्रोल की जो कीमत 102.45 रुपए थी, वहीं कीमत आज 15 माह बाद भी कायम है। जबकि जानकारों का कहना है, कच्चे तेल की कीमत जिस तरह से कम हुई है, उससे तो पेट्रोल की कीमत में 10 से 14 रुपए तक की कमी होनी चाहिए, लेकिन कीमत को कम नहीं किया जा रहा है।
35 फीसदी घटी कच्चे तेल की कीमत
अप्रैल 2020 में जब क्रूड 19.9 डॉलर पर आ गया तो देश में पेट्रोल की कीमत में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। एक साल बाद पेट्रोल 65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया तो मार्च, 2021 में पेट्रोल 90 रुपए पर चला गया। पिछले साल जून से कच्चे तेल की कीमत में लगातार गिरावट आ रही है लेकिन देश में पेट्रोल की औसत कीमत सौ रुपए के आस-पास ही है। रायपुर में इस समय कीमत 102.45 रुपए है। पिछले एक साल में क्रूड की कीमत में 35 फीसदी गिरावट आई है। साथ ही सेट्रंल एक्साइज सितंबर 2021 के पीक की तुलना में 13 रुपये कम हुआ है। फिर भी देश में पेट्रोल की चिल्हर कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पिछले साल मार्च में एक समय कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी जो 2008 के बाद इसका उच्चतम स्तर था। अभी क्रूड की कीमत 83 डॉलर प्रति बैरल है।
कीमत में टैक्स का बड़ा हिस्सा
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत में टैक्स का सबसे बड़ा हिस्सा है। जब भी कच्चे तेल में गिरावट आती है तो केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ा देती है। उदाहरण के लिए अक्टूबर 2014 में जब क्रूड की कीमत 86.8 डॉलर थी तो सेंट्रल एक्साइज 9.50 रुपये प्रति लीटर था। जनवरी, 2016 में जब क्रूड की कीमत गिरकर 28.10 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई तो सेंट्रल एक्साइज बढ़कर 19.70 रुपए प्रति लीटर हो गया। अप्रैल 2020 में कोरोना के कारण जब क्रूड की कीमत 19.90 डॉलर प्रति बैरल रह गई तो सेंट्रल टैक्स बढ़कर 23 रुपए प्रति लीटर हो गया। मई 2022 में जब क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंची तो सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज घटाकर 19.90 रुपए कर दिया। इसके बावजूद भी यह अक्टूबर 2014 के स्तर से करीब 10 रुपए ज्यादा है।
कंपनियां ने बढ़ाई बेस कीमत
क्रूड ऑयल की कीमत भी पीक से काफी नीचे आ चुकी है और सेंट्रल टैक्स भी 2021 की तुलना में कम हो चुका है लेकिन पेट्रोल और डीजल की कीमत करीब सवा साल से नहीं बदली है। इसकी वजह यह है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने डीलरों के लिए कीमत बढ़ा दी है। सितंबर 2021 में जब क्रूड की कीमत 73.10 डॉलर प्रति बैरल थी तो केंद्र सरकार प्रति लीटर पेट्रोल पर 32.90 रुपए टैक्स वसूल रही थी जबकि तेल कंपनियां डीलरों को 41.6 रुपए के भाव पर पेट्रोल बेच रही थी। एक महीने बाद जब क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई तो सेंट्रल एक्साइज घटकर 27.90 रुपए रह गया जबकि तेल कंपनियों ने बेस प्राइस बढ़ाकर 48.2 रुपए प्रति लीटर कर दिया। मार्च, 2022 में क्रूड की कीमत 100 डॉलर के पार चली गई थी तो केंद्र सरकार ने एक्साइज घटाकर 19.90 रुपए कर दिया लेकिन तेल कंपनियां 57.35 रुपए बेस प्राइस वसूल रही हैं। तबसे यही कीमत ली जा रही है।
यह है कीमत का गणित
पेट्रोल की कीमत 57.35 रुपए
एक्साइज ड्यूटी 19.90
राज्य सरकार का वेट 21.20 रुपए
डीलर का कमीशन 4.00 रुपए
कुल कीमत 102.45 रुपए प्रति लीटर



