तृणमूल कांग्रेस पर कब्जे की जंग, चुनाव आयोग के पाले में गेंद

तृणमूल कांग्रेस पर मालिकाना हक को लेकर चल रही खींचतान अब और दिलचस्प हो गई है। पार्टी के बागी गुट, जिसका नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं, ने चुनाव आयोग से जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है। बागी गुट ने आयोग से पंद्रह दिन का और समय मांगा है।
पिछला घटनाक्रम और आयोग का रुख
इससे पहले चुनाव आयोग ने बागी गुट को 6 जुलाई तक का समय दिया था। बाद में उनकी मांग को देखते हुए इसे बढ़ाकर 10 जुलाई कर दिया गया था। अब 10 जुलाई को आयोग के सामने पेश होकर उन्होंने फिर से समय बढ़ाने की गुहार लगाई है। फिलहाल चुनाव आयोग ने इस नई मांग पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। सूत्रों की मानें तो सोमवार देर रात तक इस बारे में तस्वीर साफ हो सकती है।
ममता गुट ने पेश किए दस्तावेज
एक तरफ बागी गुट समय मांग रहा है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी का गुट अपनी दावेदारी मजबूती से रख चुका है। ममता गुट ने 6 जुलाई को ही अपने सभी जरूरी दस्तावेज आयोग को सौंप दिए थे। लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने ममता गुट का पक्ष रखते हुए बागी गुट के सभी दावों को पूरी तरह से फर्जी बताया है।
फैसला कैसे होगा?
चुनाव आयोग दोनों पक्षों के जवाब मिलने के बाद ही पार्टी के अधिकार को लेकर कोई ठोस निर्णय लेगा। नियमों के अनुसार पार्टी पर किसका हक है, यह तय करने के लिए आयोग तीन मुख्य आधार देखता है। पहला, लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में चुने हुए प्रतिनिधियों की संख्या कितनी है। दूसरा, पार्टी के संगठन में कितने पदाधिकारी किस गुट के साथ हैं। तीसरा, पार्टी का अपना संविधान क्या कहता है। इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही आयोग अपना अंतिम फैसला सुनाएगा।



