बिजली चाेरी कृषि पंपों पर थाेपने के लिए मीटर न लगाने का बड़ा खेल

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ में हर साल दाे हजार करोड़ से ज्यादा की बिजली चोरी होती है। इस चाेरी काे छिपाने के लिए कृषि पंपाें में मीटर न लगाने का बड़ा खेल बरसों से चल रहा है। प्रदेश में साढ़े छह लाख कृषि पंपों के कनेक्शन हैं। इनमें किसी भी कनेक्शन में मीटर नहीं लगे हैं। बिजली चाेरी से जब लाइन लॉस बढ़ जाता है ताे लाइन लास होने का कारण कृषि पंपों काे बताकर आला अधिकारियों काे चुप करा दिया जाता है। जब पंपों में मीटर ही नहीं हैं ताे काेई कैसे तय कर सकता है कि कितनी खपत हाेती है। यही वजह है आज तक मीटर लगाने की तरफ ध्यान ही नहीं दिया जाता है। जहां मीटर लगे भी थे, वहां से गायब कर दिए गए हैं। अब तो स्मार्ट मीटर योजना से भी कृषि पंपों को अलग रखा गया है।
दो साल में कृषि पंपों के एक लाख से ज्यादा कनेक्शन दिए गए हैं। उनमें भी मीटर नहीं लगाए गए हैं। मीटर न होने के कारण खपत का आकलन नहीं होता है और लाखों की चपत भी लग रही है। हालांकि दो लाख से ज्यादा कनेक्शन फ्लैट रेट वाले हैं, लेकिन जो इस योजना में शामिल नहीं है, वो ज्यादा खपत करते हैं तो इसका नुकसान पॉवर कंपनी को ही उठाना पड़ता है।
छह और साढ़े सात हजार यूनिट मुफ्त
किसानों की सुविधा के लिए कृषि पंपों के कनेक्शन में भाजपा शासनकाल के समय से तीन एचपी वाले कनेक्शनों को छह हजार और पांच एचपी कनेक्शन वालों को साढ़े सात हजार यूनिट मुफ्त बिजली साल भर में दी जाती है। इसके बाद जितनी खपत होती है, उसका पैसा लिया जाता है। भाजपा शासन में मुफ्त बिजली को कम होने की लगातार शिकायत के बाद एक फ्लैट योजना प्रारंभ की गई थी जिसमें प्रति एचपी सौ रुपए की दर से हर माह देने पर अनलिमिटेड बिजली मिलती है। तीन एचपी वालों को साल भर में 36 सौ और पांच एचपी वालों को छह हजार रुपए लगते हैं। इतने पैसे देकर कोई भी जितनी चाहे बिजली की खपत कृषि पंपों में कर सकता है। इस योजना में दो लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं।
इसलिए नहीं लगाए मीटर
पॉवर कंपनी के कृषि पंपों में मीटर लगाने का काम सालों से नहीं किया है। शुरुआत में कृषि पंपों के कनेक्शन में मीटर लगाए जाते थे, लेकिन खेतों में मीटरों के लिए स्थान न होने पर इनको खंबों में लगा दिया जाता था। बाद में मीटरों के लिए पंप के पास स्थान भी बनाया गया। लेकिन जहां मीटर लगाए गए, वहां से मीटर ही गायब हो जाते थे, ऐसा पॉवर कंपनी के अधिकारियों का कहना है। जब से सरकार ने किसानों को मुफ्त बिजली देने की योजना प्रारंभ की इसके बाद मीटर लगाने की तरफ कंपनी ने ध्यान ही देना बंद कर दिया।
लाइन लॉस पंपों के खाते में
जानकारों का कहना है, पॉवर कंपनी कृषि पंपों में मीटर लगाने के प्रति इसलिए भी गंभीर नहीं है, क्योंकि जिस भी क्षेत्र में ज्यादा लाइन लॉस होता है, वहां कह दिया जाता है, कृषि पंपों में खपत हो रही है। इसी के साथ जहां बिजली चोरी होती है, उसकी खपत भी कृषि पंपाें के खाते में चली जाती है।



