वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की प्री-बजट बैठक

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगामी बजट के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ अपनी प्री-बजट बैठकों का समापन कर लिया है। इस दौरान उन्होंने उद्योग जगत, किसान संगठनों, अर्थशास्त्रियों, और वित्तीय विशेषज्ञों से महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए। इन बैठकों का उद्देश्य अगले वित्तीय वर्ष के लिए बजट की रूपरेखा तैयार करना और विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों को समझना था।
उद्योग जगत से वार्ता
वित्त मंत्री ने उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उद्योगपतियों ने वित्तीय सुधारों, कराधान नीतियों में स्थिरता, और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के सुझाव दिए। उन्होंने विशेष रूप से एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) के लिए सरल क्रेडिट सुविधा और कर राहत की मांग की।
कृषि क्षेत्र पर ध्यान
किसान संगठनों के साथ बैठक में, वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और आवश्यकताओं पर चर्चा की। किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी, कृषि में तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने और सिंचाई सुविधाओं में सुधार की मांग की। इसके अलावा, किसानों ने ऋण माफी और फसल बीमा योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर भी जोर दिया।
आर्थिक विशेषज्ञों की राय
वित्त मंत्री ने आर्थिक विशेषज्ञों और वित्तीय विश्लेषकों के साथ भी विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने वैश्विक आर्थिक स्थिति, भारत की आर्थिक वृद्धि के पूर्वानुमान, और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने आर्थिक सुधारों और निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत बदलावों की सलाह दी।
आगामी बजट की प्राथमिकताएं
इन बैठकों के बाद, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समावेशी विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगामी बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे, और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सरकार की प्रतिबद्धता
वित्त मंत्री ने हितधारकों को आश्वासन दिया कि उनके सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा और उन्हें बजट में उचित स्थान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने और रोजगार सृजन के लिए हर संभव कदम उठाएगी।



